कैलाश मानसरोवर यात्रा: रसुवा के रास्ते क्यों निकलते हैं तीर्थयात्री, मार्ग और लापता लोगों के बीच भारत से जुड़ाव……….

नई दिल्ली: नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ ने उन पर्यटकों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है, जो रसुवागढ़ी बार्डर क्रासिंग के पास तिब्बत जाने या वहां से लौटने का इंतजार कर रहे थे। इन पर्यटकों में ज्यादातर कैलास मानसरोवर जाने वाले तीर्थयात्री शामिल हैं।

पिछले कुछ समय से रसुवा रूट तीर्थयात्रियों के बीच लोकप्रिय होता जा रहा है। अनिवासी भारतीय और विदेशी इस रास्ते को ज्यादा पसंद कर रहे हैं, क्योंकि विदेश मंत्रालय द्वारा संचालित यात्रा भारतीय नागरिकों के लिए है और उसमें पहले से योजना बनाने और जांच-पड़ताल की जरूरत होती है।

इंटरनेट मीडिया के अनुसार, स्थानीय अधिकारियों ने इस साल कैलास मानसरोवर जाने के लिए रसुवा रूट का इस्तेमाल करने वाले तीर्थयात्रियों की रिकार्ड संख्या (13,523) दर्ज की है।

लोगों ने महंगे हुमला रूट के बजाय रसुवा रूट को ज्यादा पसंद किया है। रसुवा और हुमला, दोनों रूट का इस्तेमाल नेपाल के जरिये प्राइवेट आपरेटरों की मदद से यात्रा करने वाले तीर्थयात्री करते हैं।

भारतीय विदेश मंत्रालय कैलास मानसरोवर यात्रा का आयोजन दो आधिकारिक रास्तों से करता है। उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रा के रास्ते यात्रा में लगभग 21-22 दिन लगते हैं। सिक्किम से होकर नाथू ला दर्रा के रास्ते 20 दिन से अधिक समय लगता है।

विदेश मंत्रालय हर साल लगभग एक हजार तीर्थयात्रियों को भेजता है, जिनका चयन कंप्यूटराइज्ड लाटरी सिस्टम से किया जाता है। इन रास्तों से यात्रा करने पर प्रति व्यक्ति लगभग दो लाख रुपये का खर्च आता है।

चूंकि, क्योंकि यात्रियों की संख्या बहुत सीमित होती है, इसलिए कई तीर्थयात्री नेपाल के रास्ते निजी ऑपरेटरों द्वारा कराई जाने वाली यात्रा का विकल्प चुनते हैं। इन यात्राओं में संख्या की कोई सीमा या लाटरी से चयन की प्रक्रिया नहीं होती है।

यहां के दो सबसे लोकप्रिय रास्ते हैं-एक जो रसुवा से होकर गुजरता है और दूसरा हिल्सा से होकर जाता है। कैलास मानसरोवर का नेपाल वाला रूट काठमांडू से शुरू होता है। रसुवा से होकर सड़क मार्ग से यात्रा करने में लगभग 10-14 दिन लगते हैं।

दूसरा रास्ता हेलीकॉप्टर के जरिये है (नेपालगंज और सिमिकोट/हिल्सा होते हुए), जिसमें लगभग 5-11 दिन लगते हैं।

एक एजेंट के अनुसार, हर साल मई से सितंबर के बीच इन रास्तों पर बड़ी संख्या में आने वाले यात्रियों के लिए सिर्फ एक वैध पासपोर्ट और खास चीनी परमिट (जिसमें चीनी ग्रुप वीजा और तिब्बत यात्रा परमिट शामिल हैं) की जरूरत होती है।

काठमांडू से यात्रा का खर्च तीन लाख रुपये से ज्यादा हो सकता है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि यात्री कौन-सी सुविधाएं लेते हैं।