उत्तराखंड के ऋषिकेश में पेड़ों की कटाई पर लगी रोक, जानिए क्या बोले पर्यावरणविद……..
ऋषिकेश: ऋषिकेश के जंगलों में पेड़ों की कटाई पर रोक ने पर्यावरण प्रेमियों को बड़ी राहत दी है. ये सिर्फ पेड़ नहीं बल्कि सदियों पुरानी प्राकृतिक धरोहर हैं, जिनसे इलाके का मौसम, जलस्रोत और जैव विविधता जुड़ी हुई है. पर्यावरणविदों के मुताबिक कुछ साल और देवदार के पेड़ सैकड़ों से लेकर 1000 साल तक पुराने हैं, जिन्हें दोबारा तैयार करना आसान नहीं होगा।
ऋषिकेश: पहाड़ों में जंगल सिर्फ पेड़ों का समूह नहीं होते, बल्कि यहां के लोगों की जिंदगी, संस्कृति और भविष्य का अहम हिस्सा होते हैं. हाल ही में ऋषिकेश में सड़क चौड़ीकरण को लेकर हो रही पेड़ों की कटाई पर लगी रोक ने सभी को बड़ी राहत दी है. लंबे समय से इस इलाके के लोग जंगल बचाने की मांग कर रहे थे. यह जंगल उनके लिए सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि जीवन का आधार है. इन्हीं पेड़ों की वजह से इलाके में ठंडक बनी रहती है, बारिश का संतुलन बना रहता है और कई प्राकृतिक जलस्रोत भी जीवित रहते हैं।
अरुण कुमार ने बताया इस जंगल में मौजूद साल और देवदार के कई पेड़ बेहद पुराने हैं. इनमें से कुछ पेड़ों की उम्र सैकड़ों साल तो कुछ की उम्र 1000 साल से भी ज्यादा बताई जाती है. इन पेड़ों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनकी बढ़ने की रफ्तार बहुत धीमी होती है. एक छोटा पौधा विशाल पेड़ बनने में कई पीढ़ियां गुजर जाती हैं. ऐसे में अगर इन्हें काट दिया जाए तो इनकी भरपाई कुछ वर्षों में नहीं, बल्कि सदियों में भी आसान नहीं होगी।
जैव विविधता में पेड़ों का अहम रोल
उन्होंने बताया कि पुराने पेड़ सिर्फ ऑक्सीजन देने का काम नहीं करते, बल्कि ये जैव विविधता का भी अहम हिस्सा होते हैं. इन पर कई तरह के पक्षी, कीड़े, छोटे जीव और वनस्पतियां निर्भर रहती हैं. एक पेड़ के खत्म होने का असर पूरे जंगल के जीवन चक्र पर पड़ता है. यही वजह है कि दुनिया भर में पुराने जंगलों को बचाने पर सबसे ज्यादा जोर दिया जाता है. विकास जरूरी है, लेकिन ऐसा विकास भी जरूरी है जो प्रकृति को नुकसान पहुंचाए बिना आगे बढ़ सके।
आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे सौगात
फिलहाल पेड़ों की कटाई पर रोक लगने से सदियों पुराने इन पेड़ों को नई जिंदगी मिल गई है. लेकिन अरुण बताते हैं कि यह सिर्फ एक पड़ाव है, मंजिल नहीं. आने वाले समय में भी इन जंगलों की सुरक्षा, निगरानी और संरक्षण पर लगातार काम करना होगा. क्योंकि एक बार अगर ऐसे पुराने पेड़ खत्म हो गए, तो उन्हें दोबारा उसी रूप में खड़ा करने में कई सौ साल लग जाएंगे. इसलिए आज लिया गया सही फैसला आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ी सौगात साबित हो सकता है।


