उत्तराखंड के 15 हजार से अधिक गांवों में सोलर लाइटों का खुलेगा कच्चा-चिट्ठा, पंचायती राज निदेशालय ने मांगा ब्योरा………
देहरादून: विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड के गांवों को सोलर लाइट से जगमगाने के दावों की अब वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। इस कड़ी में राज्य की सभी 7,813 ग्राम पंचायतों के 15906 गांवों में विभिन्न विभागों की ओर से लगाई गईं सोलर लाइट का हिसाब-किताब जुटाया जा रहा है।
कितने गांव सोलर लाइट की रोशनी के दायरे में आ चुके हैं, इनकी क्या स्थिति है, किन गांवों को यह सुविधा नहीं मिली है, ऐसे तमाम बिंदुओं पर पंचायती राज निदेशालय ने जिला पंचायती राज अधिकारियों से ब्योरा मांगा है। इसके अलावा गांवों में लगे सौर ऊर्जा संयंत्र, नदी-नालों की स्थिति, कचरा प्रबंधन के बारे में भी जानकारी मांगी गई है।
ग्राम्य विकास विभाग, पंचायती राज, वन समेत अन्य विभाग अलग-अलग योजनाओं के तहत वर्षों से गांवों में सोलर लाइटें लगा रहे हैं। इस मुहिम का उद्देश्य केवल ग्रामीण अंचलों को रात में रोशन करना नहीं, बल्कि वन क्षेत्रों से सटे गांवों में जंगली जानवरों की आवाजाही से होने वाले खतरे को कम करना और लोगों की सुरक्षा बढ़ाना भी है।
यद्यपि, अब तक ऐसा कोई स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, जिससे यह पता चल सके कि वास्तव में गांवों में कितनी सोलर लाइटें लगी हैं और कितने गांवों को वास्तविक रूप से इस मुहिम का लाभ मिला है।
इस सबको देखते हुए पंचायती राज निदेशालय ने सभी जिलों के जिला पंचायती राज अधिकारियों को गांवों में सोलर लाइटों की संख्या, उनकी कार्यशील स्थिति और ग्राम पंचायतवार आच्छादन का ब्योरा मांगा है।
पंचायती राज निदेशक निधि यादव के अनुसार इस कवायद से उन गांवों की भी पहचान हो सकेगी, जहां सोलर लाइटें पर्याप्त नहीं हैं या फिर पहले से लगाई गई लाइटें खराब पड़ी हैं। इससे आगामी योजनाओं के लिए प्राथमिकता तय करने के साथ ही जरूरतमंद गांवों तक यह सुविधा पहुंचाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि गांवों में लगे सौर ऊर्जा संयंत्र, नदी-नालों की की स्थिति, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को से संबंधित जानकारियां देने को भी कहा गया है। इन आंकड़ों के आधार पर ग्राम पंचायतों का अद्यतन डाटाबेस तैयार हो सकेगा।


