उत्तराखंड में गुजरात के बाद सबसे बड़ा नेटवर्क, 1269 फीडरों की रियल टाइम निगरानी से बिजली सप्लाई होगी तेज……….
देहरादून: उत्तराखंड में बिजली आपूर्ति की निगरानी के लिए 1,269 फीडरों को रियल टाइम मानीटरिंग से जोड़ा जा रहा है। देश में गुजरात के 14,000 फीडरों के बाद उत्तराखंड का यह आंकड़ा सबसे बड़ा है।
खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, केरल और तमिलनाडु समेत अधिकांश राज्यों में अभी फीडरों की रियल टाइम मानीटरिंग शुरू नहीं हुई है। ऐसे में उत्तराखंड की यह कोशिश ऊर्जा क्षेत्र में प्रेरणादायी है।
उत्तराखंड में लंबी बिजली लाइनें, जंगल, पहाड़ी इलाके और मानसून के दौरान भूस्खलन जैसी परिस्थितियां बिजली व्यवस्था के लिए चुनौती हैं। ऐसे में फीडर की स्थिति का रियल टाइम डेटा मिलने से ऊर्जा निगम को यह पता लगाने में मदद मिलती है कि किस क्षेत्र में बिजली आपूर्ति बाधित हुई है।
रियल टाइम सिस्टम में फीडर का डेटा मिलने से समस्या वाले नेटवर्क की पहचान तेजी से हो पाती है। इससे टीम को सीधे संबंधित क्षेत्र में भेजा जाता है और आपूर्ति बहाल करने में समय बचता है।
1106 करोड़ की स्मार्ट मीटरिंग
उत्तराखंड में आरडीएसएस के तहत स्मार्ट मीटरिंग कार्यों के लिए 1106 करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं। इससे उपभोक्ताओं की मीटर रीडिंग, बिलिंग और बिजली खपत का डेटा डिजिटल होगा। मीटर रीडिंग में मानवीय हस्तक्षेप कम होने के साथ बिलिंग की सटीकता बढ़ाने और बिजली चोरी पर नियंत्रण में मदद मिल सकेगी।
226 करोड़ से डिजिटल होगा यूपीसीएल
यूपीसीएल के लिए 226 करोड़ रुपये के आइटी कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इसमें बिलिंग साल्यूशन, जीआइएस आधारित सिस्टम और रियल टाइम डेटा अधिग्रहण जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। इससे बिजली नेटवर्क, उपभोक्ता सेवाओं और विभागीय कामकाज को डिजिटल प्लेटफार्म पर एकीकृत करने का आधार तैयार होगा।
ऋषिकेश में 556 करोड़ का स्मार्ट डिस्ट्रीब्यूशन
ऋषिकेश के लिए 556.05 करोड़ रुपये की स्मार्ट डिस्ट्रीब्यूशन परियोजना स्वीकृत की गई है। इसमें 500.44 करोड़ रुपये केंद्रीय अनुदान है। परियोजना में एससीएडीए, स्मार्ट तकनीक, जीआइएस सबस्टेशन, वितरण ट्रांसफार्मर सिस्टम और एचटी-एलटी लाइनों के आधुनिकीकरण जैसे काम शामिल हैं।
कंट्रोल रूम से नियंत्रित होंगे तीन शहर
उत्तराखंड के तीन शहर ऋषिकेश, हरिद्वार और देहरादून में बिजली नेटवर्क कंट्रोल सेंटर से संचालित होगा। इससे फाल्ट, लोड व नेटवर्क की स्थिति की निगरानी की जा सकेगी। इसके लिए यूपीसीएल के 130 कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है।


