उत्तराखंड की राजधानी में झमाझम बारिश से मौसम सुहावना, अगले दो दिन बढ़ेगी मानसून की रफ्तार……….

देहरादून: उत्तराखंड में मानसून की आधिकारिक दस्तक से पहले ही बारिश का दौर तेज हो गया है। राजधानी देहरादून समेत प्रदेश के कई जिलों में मंगलवार को झमाझम बारिश हुई, जिससे लोगों को गर्मी से राहत तो मिली, लेकिन उमस अभी भी बरकरार है।

मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून ने पौड़ी, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों के कुछ हिस्सों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। वहीं प्रदेश के अन्य जिलों में भी गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना जताई गई है।

उत्तराखंड के कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी
मौसम विभाग के अनुसार हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर जिले के कुछ क्षेत्रों में भी गरज-चमक के साथ बारिश और 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।

मानसून में देरी से बढ़ी उमस, गर्मी का असर अभी रहेगा।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस वर्ष उत्तराखंड में मानसून सामान्य से करीब एक सप्ताह की देरी से सक्रिय हो सकता है। यही वजह है कि प्रदेश में गर्मी और उमस का असर अपेक्षा से अधिक समय तक बना हुआ है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस बार अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास रहा है, लेकिन मानसून की धीमी रफ्तार के कारण वातावरण में नमी बढ़ने से लोगों को उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ रहा है।

राजधानी देहरादून में मंगलवार सुबह से तेज धूप और उमस ने लोगों को परेशान किया। दोपहर बाद मौसम ने करवट ली और तेज बारिश शुरू हो गई, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई।

अगले 48 घंटे अहम, प्रदेश में सक्रिय हो सकता है मानसून।
मौसम विज्ञान केंद्र का अनुमान है कि अगले दो दिनों के भीतर उत्तराखंड के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय हो सकता है। इसके बाद प्रदेश के अधिकांश जिलों में बारिश की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है।

हालांकि तब तक लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद कम है। मौसम विभाग ने पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा करने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों को मौसम अपडेट पर लगातार नजर रखने की सलाह दी है।

मौसम विभाग की सलाह
भारी बारिश के दौरान नदी-नालों के किनारे जाने से बचें।
बिजली चमकने के समय खुले स्थानों पर न रहें।
पहाड़ी मार्गों पर यात्रा करते समय भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतें।
मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करें।