उत्तराखंड में 134 साल की विरासत का उत्सव बना टिटोली, जड़ों से जुड़ने गांव लौटे प्रवासी……..

बागेश्वर: पहाड़ों से लगातार हो रहे पलायन के बीच कांडा तहसील का टिटोली गांव उम्मीद की एक नई कहानी लिख रहा है। रोजगार और शिक्षा के लिए देश के विभिन्न शहरों में बस चुके ग्रामीण हर वर्ष अपनी जन्मभूमि की ओर लौट रहे हैं। अपने गांव, संस्कृति तथा पूर्वजों से जुड़ाव का यह भाव मंगलवार को तब देखने को मिला, जब टिटोली गांव ने अपना 134वां स्थापना दिवस पूरे उत्साह, श्रद्धा और गौरव के साथ मनाया।

स्थापना दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ने का भावनात्मक पर्व बन गया। कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्वजों को तर्पण तथा श्रद्धांजलि अर्पित कर किया गया। कुल पुरोहित दीप पांडे ने पितरों का आह्वान किया, जिसके बाद सुंदरकांड पाठ तथा सामूहिक प्रार्थना का आयोजन हुआ। ग्रामीणों ने गांव, क्षेत्र, राज्य और राष्ट्र की समृद्धि के लिए मंगलकामना की।

नेपाल से टिटोली तक का 134 वर्षों का सफर
24 जून 1894 को गांव के पूर्वजों ने भूमि क्रय कर यहां स्थायी बसावट की नींव रखी थी। गांव के मूल पूर्वज नेपाल, जौलजीबी, पिथौरागढ़ से छाना बिलौरी क्षेत्र से यहां पहुंचे थे। कठिन परिस्थितियों में बसाए गए इस गांव ने समय के साथ अपनी अलग पहचान बनाई तथा आज यह शिक्षा, सैन्य परंपरा और सामाजिक एकता के लिए जाना जाता है।

शिक्षा और सेना ने दिलाई अलग पहचान
वर्ष 1901 में गांव में प्राथमिक विद्यालय की स्थापना हुई, जिससे टिटोली क्षेत्र के शुरुआती शिक्षा केंद्रों में शामिल हो गया। वहीं 1916 में गोरखा राइफल्स में पहली भर्ती के साथ शुरू हुई सैन्य परंपरा आज भी कायम है। गांव के अनेक युवाओं ने भारतीय सेना में सेवा देकर देश की रक्षा में योगदान दिया है।

कर्नल बीएस रौतेला ने बताया कि गांव के पूर्वज स्वर्गीय भगवान सिंह के परिवार ने यहां बसावट की नींव रखी थी। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हवलदार धन सिंह को जंगी इनाम तथा हरक सिंह को मिलिट्री क्रास से सम्मानित किया गया। स्वतंत्रता के बाद जम्मू-कश्मीर की रक्षा में उल्लेखनीय योगदान देने वाले जमादार यानी नायब सूबेदार धन सिंह को वीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

पलायन के दौर में जड़ों से जोड़ रही मातृभूमि रक्षा समिति
समय के साथ गांव भी पलायन की समस्या से प्रभावित हुआ, लेकिन गांव से बाहर रहने वाले लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ने और नई पीढ़ी को गांव के इतिहास से परिचित कराने के उद्देश्य से वर्ष 2022 में मातृभूमि रक्षा समिति का गठन किया गया। समिति ने निर्णय लिया कि प्रत्येक वर्ष 24 जून को स्थापना दिवस सामूहिक रूप से मनाया जाएगा।

नई पीढ़ी को मिला अपनी पहचान जानने का अवसर
समारोह में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे ग्रामीणों ने अपने बच्चों को गांव का इतिहास, पूर्वजों का संघर्ष और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया। बुजुर्गों ने इसे गांव की एकता और पहचान को जीवित रखने की महत्वपूर्ण पहल बताया। सभी ने संकल्प लिया कि आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी मातृभूमि, संस्कृति और परंपराओं से जोड़े रखेंगे।

समारोह में मुख्य अतिथि कर्नल वेद प्रकाश जोशी (सेना मेडल), जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी, विशिष्ट अतिथि सहायक अभियंता मनोज पंत, जगन्नाथ चंदोला, मोहन चंद्र चंदोला, रतन सिंह नगरकोटी, भवान सिंह धपोला, श्याम सिंह धपोला, भगवान सिंह धपोला, उम्मेद सिंह रौतेला, दीवान सिंह रौतेला, आनंद सिंह रौतेला, सुरेंद्र सिंह रौतेला सहित बड़ी संख्या में मातृशक्ति और ग्रामीण उपस्थित थे।