अब 8वें वेतन आयोग: कैलोरी से तय होगी सैलरी? 69 हजार न्यूनतम वेतन की मांग……..

नई दिल्ली: 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम वेतन निर्धारण के लिए नया और वैज्ञानिक फॉर्मूला सामने रखा है। इस बार बहस केवल महंगाई भत्ते या वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि कर्मचारियों की दैनिक कैलोरी आवश्यकता, भोजन की लागत, स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास जैसे खर्चों को आधार बनाकर वेतन तय करने की मांग की जा रही है।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्तमान वेतन ढांचा बदलती जीवनशैली और बढ़ती महंगाई के अनुरूप नहीं है। इसी कारण 8वें वेतन आयोग के समक्ष न्यूनतम वेतन बढ़ाकर लगभग 69 हजार रुपये प्रतिमाह करने का प्रस्ताव रखा गया है।

3490 कैलोरी बना वेतन निर्धारण का नया आधार
नेशनल काउंसिल-ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने आयोग को सौंपे ज्ञापन में कहा है कि अब तक वेतन निर्धारण 2700 कैलोरी के पुराने मानक पर आधारित था, जो वर्तमान परिस्थितियों में अप्रासंगिक हो चुका है।

संगठन ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन (NIN) के नवीनतम मानकों का हवाला देते हुए कहा है कि एक कार्यरत वयस्क के लिए प्रतिदिन 3490 कैलोरी की आवश्यकता को आधार बनाया जाना चाहिए।

भोजन से लेकर मकान तक का पूरा हिसाब
कर्मचारी संगठनों ने अपने ज्ञापन में चावल, गेहूं, दाल, दूध, फल, सब्जियां, खाद्य तेल, अंडे, मछली, ईंधन और गैस सिलेंडर जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों का विस्तृत विवरण शामिल किया है।

इसके साथ ही स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन और शहरी आवास पर बढ़ते खर्चों को जोड़कर यह तर्क दिया गया है कि वर्तमान न्यूनतम वेतन एक परिवार की वास्तविक जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहा है।

69 हजार रुपये न्यूनतम वेतन की मांग
NC-JCM ने आयोग के सामने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं—

फिटमेंट फैक्टर 3.833 किया जाए
न्यूनतम वेतन लगभग 69,000 रुपये तय किया जाए
महंगाई और पोषण मानकों के अनुसार वेतन संरचना तैयार की जाए।

NPS कर्मचारी संगठन ने भी रखा प्रस्ताव

ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) ने भी अपने ज्ञापन में कहा है कि वर्तमान महंगाई के दौर में एक परिवार की न्यूनतम जरूरतों को पूरा करने के लिए 55,000 से 60,000 रुपये मासिक वेतन आवश्यक है।

फेडरेशन ने दूध, सब्जियां, LPG, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और ईंधन की बढ़ती कीमतों को इसका प्रमुख आधार बताया है।

लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स पर पड़ेगा असर

यदि आयोग इन मांगों को स्वीकार करता है तो इसका सीधा प्रभाव
बेसिक पे
फिटमेंट फैक्टर
महंगाई भत्ता (DA)
हाउस रेंट अलाउंस (HRA)
पेंशन
रिटायरमेंट बेनिफिट्स
पर देखने को मिलेगा।

देशभर में चल रहा परामर्श का दौर
8वें वेतन आयोग ने विभिन्न कर्मचारी संगठनों के साथ विचार-विमर्श शुरू कर दिया है। दिल्ली में बैठकों का पहला चरण पूरा हो चुका है, जबकि आगामी दौर हैदराबाद, श्रीनगर और लद्दाख में आयोजित किए जाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार वेतन आयोग केवल वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आधुनिक भारत में एक परिवार के वास्तविक जीवन-यापन खर्च को आधार बनाकर सिफारिशें तैयार कर सकता है।