भारत का पहला बैरियर-फ्री टोल सिस्टम शुरू, अब टोल प्लाजा पर रुकने का झंझट खत्म…….

दिल्ली: भारत में बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम की शुरुआत हो चुकी है। देश का पहला मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम गुजरात में नेशनल हाईवे 48 (NH48) के सूरत-भरूच खंड पर स्थित चोरायासी टोल प्लाजा पर शुरू कर दिया गया है। अब टोल देने के लिए गाड़ी रोकने या लाइन लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आइए आपको इसके बारे में डिटेल में बताते हैं।

भारत में हाईवे पर सफर करने वालों के लिए एक अच्छी खबर है। बीते कुछ समय से सरकार बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम पर काम कर रही थी। यह एक ऐसा टोल सिस्टम है जिसमें गाड़ियों को टोल प्लाजा पर रुकना भी न पड़े और अपने आप टोल भी कट जाए। अब आखिरकार इसकी शुरुआत हो गई है।

गुजरात में देश के पहले बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम की शुरुआत हो गई है। गुजरात में नेशनल हाईवे 48 (NH48) के सूरत-भरूच खंड पर स्थित चोरायासी टोल प्लाजा पर देश का पहला मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम शुरू कर दिया गया है। अब आपको टोल देने के लिए गाड़ी रोकने या लाइन लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आइए जानते हैं यह नया सिस्टम कैसे काम करेगा।

कैसे काम करेगा यह सिस्टम?
इस नए सिस्टम में टोल प्लाजा पर कोई बैरियर यानी कि फाटक नहीं होगा। इसके बजाए टोल प्लाजा पर खास ANPR कैमरे लगाए गए हैं, जो गाड़ी की नंबर प्लेट को पहचानेंगे। इसके बाद टोल टैक्स सीधे फास्टैग अकाउंट से कट जाएगा। सारा काम अपने आप ऑनलाइन हो जाएगा। किसी व्यक्ति को इस काम को मैनुअली नहीं करना होगा। गाड़ियां बिना रुके टोल प्लाजा से गुजरेंगी और टोल अपने आप कट जाएगा।

बिना रुके कटेगा टोल
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक लक्ष्य यह है कि कारें 80 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से बिना रुके टोल पॉइंट से गुजर सकें और उनका टैक्स अपने आप कट जाए।

सरकार की योजना है कि 2026 के अंत तक देश के 1,000 से ज्यादा टोल बूथों पर यह बैरियर-फ्री सिस्टम लागू कर दिया जाए।

नियम और जुर्माने
अगर किसी वजह से टोल का भुगतान तुरंत नहीं हो पाता है, तो सरकार ने उसके लिए सख्त और स्पष्ट नियम बनाए हैं।

ई-नोटिस – टोल न कटने पर पहले वाहन मालिक को फोन पर एक डिजिटल नोटिस भेजा जाएगा, जिसमें यात्रा की पूरी जानकारी होगी।

72 घंटे की मोहलत – वाहन मालिक के पास बिना किसी जुर्माने के टोल भरने के लिए 72 घंटे का समय होगा।

जुर्माना – अगर 72 घंटे के अंदर भुगतान नहीं किया जाता है, तो व्यक्ति को दोगुना टोल देना पड़ सकता है।

वाहन पोर्टल से जुड़ाव – अगर 15 दिनों तक भुगतान नहीं किया गया, तो गाड़ी का रिकॉर्ड वाहन (Vahan) डेटाबेस में ब्लॉक हो सकता है, जिससे गाड़ी से जुड़ी सरकारी सेवाएं रुक सकती हैं।

इस सिस्टम के फायदे
समय की बचत – पहला फायदा यह है कि टोल पर लगने वाली लंबी लाइनों से छुटकारा मिलेगा।

ईंधन की बचत – दूसरा फायदा यह कि बार-बार गाड़ी रोकने और स्टार्ट करने की जरूरत नहीं होगी, जिससे पेट्रोल-डीजल की बचत होगी।

प्रदूषण में कमी – गाड़ियां खड़ी नहीं रहेंगी, तो धुंआ भी कम होगा। इससे प्रदूषण में कमी आएगी।

पारदर्शिता – इस सिस्टम में सारा काम अपने आप होगा, बिना किसी इंसानी मदद के। इसलिए इससे पारदर्शिता भी बढ़ेगी। इसमें गड़बड़ी की गुंजाइश कम होगी।