उत्तराखंड में उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण में देरी पर हाई कोर्ट नाराज, सरकार करेगी नियमावली में बदलाव…….

नैनीताल: हाई कोर्ट ने प्रदेश के सरकारी विभागों में सालों से कार्यरत 20 हजार से अधिक उपनल संविदा कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी नियमित नहीं करने, न्यूनतम वेतनमान नहीं देने व वेतन से जीएसटी काटे जाने के विरुद्ध दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई की।

कोर्ट ने पूर्व का आदेश का अनुपालन नहीं करने पर संबंधित सचिव को अगले सप्ताह बुधवार 15 जुलाई को पेश होने के निर्देश दिए हैं। याचिका में मुख्य सचिव, सचिव कार्मिक, सचिव वित्त व सचिव सैनिक कल्याण को पक्षकार बनाया गया है।

सरकार ने मांगा समय
गुरुवार को न्यायाधीश न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए सरकार को नियमावली में संशोधन करना पड़ेगा, इसलिए मामले में समय दिया जाय।

कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि पूर्व के आदेशों पर आज तक सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया, जो कोर्ट की अवमानना है। हर समय कोर्ट से समय दिए जाने की मांग की जाती है, संघ की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि उन्हें समान कार्य समान वेतन दिये जाने के लिए उनसे बांड भरने का दबाव डाला जा रहा है, जो गलत है।

दरअसल एक साल से प्रदेश सरकार की ओर से कोर्ट के आदेश का अनुपालन करने के लिए बार-बार अतिरिक्त समय मांगा जा रहा है, जिसको लेकर उपनल कर्मी नाराज हैं।

उपनल कर्मचारी संघ की ओर से अवमानना याचिका दायर कर कहा गया है कि 2018 में हाई कोर्ट ने उपनल संविदा कर्मचारियों को नियमितीकरण का आदेश दिया था। सरकार 2024 में सुप्रीम कोर्ट पहुंची तो वहां से भी सरकार को राहत नहीं मिली।

जब हाईकोर्ट में इस पूरे मामले में अवमानना याचिका दाखिल हुई तो सरकार पिछले एक साल से इसको लटकाती रही है, सरकार ना तो कोर्ट के आदेश का अनुपालन कर रही है, ना ही नियमित करने के लिए कोई कदम उठा रही है। आदेश का अनुपालन नहीं होने की वजह से 22 हजार उपनल कर्मचारियों का भविष्य अधर में है।