उत्तराखंड के छात्रवृत्ति घोटाले में दून कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग पर मुकदमा। बढ़ी मुश्किल……….

देहरादून: उत्तराखंड में चर्चित अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति घोटाला में बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रेमनगर थाना पुलिस ने दून कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। कॉलेज पर वर्ष 2021-22 और 2022-23 के दौरान अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजनाओं में कथित फर्जीवाड़ा कर सरकारी धन हड़पने का आरोप है।

मामले में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी जे.एस. रावत की ओर से दर्ज कराई गई तहरीर के आधार पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई शासन, भारत सरकार की जांच रिपोर्ट और एसआईटी की जांच के बाद की गई है।

शासन और भारत सरकार की रिपोर्ट के बाद दर्ज हुई FIR
एफआईआर के अनुसार वर्ष 2021-22 एवं 2022-23 में संचालित अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजनाओं में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद जांच शुरू की गई थी। शासन स्तर पर हुई समीक्षा बैठकों में सामने आया कि छात्रवृत्ति वितरण में कई शिक्षण संस्थान संदिग्ध पाए गए हैं।

भारत सरकार द्वारा जारी एसओपी (Standard Operating Procedure) और जांच रिपोर्ट के आधार पर राज्यभर के 95 संदिग्ध शिक्षण संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई का निर्णय लिया गया था। इसी क्रम में देहरादून जनपद के संस्थानों की जांच कराई गई।

34 संस्थानों की जांच में दून कॉलेज संदिग्ध पाया गया
जिलाधिकारी के आदेश पर एसडीएम सदर देहरादून की अध्यक्षता में गठित संयुक्त जांच समिति ने जिले के 34 संस्थानों की जांच की। जांच के दौरान Doon College of Engineering & Technology (ID: C-21329) को संदिग्ध श्रेणी में चिन्हित किया गया।

जांच रिपोर्ट में सामने आया कि संस्थान की KYC प्रक्रिया निदेशालय समाज कल्याण की आईटी सेल के माध्यम से हुई थी, जबकि छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले सभी छात्र उत्तराखंड के बाहर के राज्यों से संबंधित पाए गए। इसके अलावा छात्रवृत्ति सत्यापन से जुड़े SNO, DNO और INO अधिकारी भी बाहरी राज्यों से संबंधित पाए गए, जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा गया।

एसआईटी जांच में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं
एफआईआर में उल्लेख किया गया है कि अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति वितरण में हुई कथित धोखाधड़ी की जांच के लिए पहले ही एसआईटी (Special Investigation Team) का गठन किया जा चुका था। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने बैठक में स्पष्ट किया था कि आगे की आपराधिक जांच के लिए संबंधित संस्थानों के खिलाफ पहले एफआईआर दर्ज होना आवश्यक है।

इसी आधार पर शासन के निर्देशों के अनुपालन में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने संबंधित संस्थान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई की।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
प्रेमनगर थाना पुलिस ने कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ आईपीसी की धारा:

409 (आपराधिक न्यासभंग)
420 (धोखाधड़ी)
467 (जालसाजी)
468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से कूटरचना)
471 (फर्जी दस्तावेज का उपयोग)
के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

पुलिस ने शुरू की विस्तृत जांच
पुलिस अब छात्रवृत्ति वितरण, लाभार्थियों के दस्तावेज, सत्यापन प्रक्रिया, बैंक भुगतान और संबंधित अभिलेखों की गहन जांच कर रही है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि छात्रवृत्ति राशि किन खातों में गई और फर्जीवाड़े में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
प्रेमनगर थाना पुलिस का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।