उत्तराखंड स्थापना दिवस पर 26 साल में बदली अल्मोड़ा की तस्वीर, उपलब्धियों के बावजूद चुनौतियां बरकरार……

अल्मोड़ा: उत्तराखंड राज्य गठन के 26 वर्षों में अल्मोड़ा जनपद ने विकास के कई पड़ाव पार किए हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और पर्यटन के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल हुईं।

मेडिकल कालेज, आईएसबीटी, हेलीपैड और सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, फ्रूट क्राफ्ट सेंटर जैसी सौगातों ने जनपद की तस्वीर बदलने की उम्मीद जगाई। इसके बावजूद पलायन, बेरोजगारी, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और बदहाल बुनियादी ढांचा आज भी जनपद के विकास की राह में बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं में विस्तार, फिर भी रेफर होने को मजबूर मरीज
स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में मेडिकल कालेज की स्थापना को बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यहां मरीजों के बेहतर उपचार के लिए आइसीयू और एनआइसीयू वार्ड बनाए गए हैं। कैंसर रोगियों के लिए सर्जरी और कीमोथेरेपी की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।

इसके साथ ही मेडिकल कालेज में स्नातकोत्तर (पीजी) कक्षाएं शुरू होने से विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद जगी है। यहां से अल्मोड़ा सहित अन्य क्षेत्रों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर तैयार हो सकेंगे। हालांकि, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के बावजूद गंभीर और जटिल बीमारियों के उपचार के लिए मरीजों को अब भी हल्द्वानी, बरेली और दिल्ली का रुख करना पड़ रहा है।

जनपद में डाक्टरों की कमी भी बड़ी समस्या बनी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, चिकित्सकों के 302 स्वीकृत पदों के सापेक्ष करीब 115 डाक्टर ही तैनात हैं। वहीं, सोमेश्वर और चौखुटिया के अस्पतालों को उच्चीकृत कर उपचिकित्सा केंद्र का दर्जा दिया गया है।

शिक्षा के क्षेत्र में बढ़े संस्थान, स्कूलों पर लगे ताले
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एसएसजे विश्वविद्यालय की स्थापना से अल्मोड़ा को नई पहचान मिली है। दूसरी ओर प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। जनपद में अब तक 277 प्राथमिक और 102 जूनियर हाईस्कूल बंद हो चुके हैं। स्कूलों के बंद होने के पीछे घटती छात्र संख्या और पलायन जैसी समस्याएं भी अहम हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

नगर निगम बना अल्मोड़ा, लेकिन सुविधाओं का इंतजार
अल्मोड़ा नगर पालिका को नगर निगम का दर्जा मिलने से शहर के विस्तार और विकास को लेकर लोगों की उम्मीदें बढ़ी थीं। माना जा रहा था कि इससे शहरी सुविधाओं में सुधार होगा और विकास कार्यों को गति मिलेगी। वहीं ऐसा नहीं हो सका है।

पर्यटन और कनेक्टिविटी में संभावनाएं, कई योजनाएं अधूरी
जागेश्वर धाम, नंदादेवी मंदिर और अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों के विकास से जनपद में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। आईएसबीटी और हेलीपैड जैसी सुविधाओं से कनेक्टिविटी बेहतर बनाने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं। वहीं, फ्रूट क्राफ्ट सेंटर का भवन तैयार होने के बावजूद इसका संचालन शुरू नहीं हो पाया है।

खेती का रकबा घटा, 444 गांव अब भी सड़क से वंचित
जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति भी विकास की चुनौतियों को उजागर करती है। पिछले 26 वर्षों में 444 गांवों तक सड़क नहीं पहुंच सकी है। वहीं, जनपद में खेती का रकबा 30,752 हेक्टेयर घट गया है। पलायन के चलते कई गांवों में आबादी और खेती दोनों प्रभावित हो रहे हैं।