उत्तराखंड में 15 विभूतियों को उत्तराखंड गौरव सम्मान, कलाकारों और साहसी बच्चों का भी हुआ सम्मान……….
देहरादून: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित उत्तराखण्ड राज्योत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 15 महानुभावों को उत्तराखण्ड गौरव सम्मान पुरस्कार-2026 से सम्मानित किया। राज्य के विकास, सामाजिक सेवा, शिक्षा, चिकित्सा, कला, संस्कृति, पर्यावरण, खेल एवं अन्य क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को यह सम्मान प्रदान किया गया। नक्शेदेखें
उत्तराखण्ड गौरव सम्मान पुरस्कार-2026 के अंतर्गत राजनीतिक एवं शासकीय क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए स्वर्गीय मेजर जनरल भुवन चन्द्र खण्डूड़ी को मरणोपरांत सम्मानित किया गया। चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. जीवन सिंह तितियाल, उद्यमिता के क्षेत्र में मनमोहन भारद्वाज, फिल्म जगत में योगदान के लिए हिमानी शिवपुरी, लोक जागर गायन के क्षेत्र में हेमा नेगी करासी तथा शिक्षा एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए डॉ. गिरीश रंजन तिवारी को सम्मानित किया गया।
इसी क्रम में सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए अनीता थपलियाल शर्मा एवं कश्मीर सिंह, पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में पर्यावरणविद् सुरेश भाई तथा लोक गायन के क्षेत्र में रेशमा शाह को उत्तराखण्ड गौरव सम्मान पुरस्कार प्रदान किया गया। नक्शेदेखें
खेल के क्षेत्र में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा से प्रदेश का नाम रोशन करने वाली एकता बिष्ट, वंदना कटारिया, अंकिता ध्यानी, निकिता चंद एवं कपिल पोखरिया को भी उत्तराखण्ड गौरव सम्मान पुरस्कार-2026 से सम्मानित किया गया।
उत्तराखंड राज्योत्सव के मंच पर शुक्रवार को प्रदेश की सांस्कृतिक प्रतिभाओं और अदम्य साहस का परिचय देने वाले बच्चों को सम्मानित किया गया। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रसिद्ध लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी, अभिनेता हेमंत पांडे सहित छह बच्चों को विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया। लोकगायक नेगी और अभिनेता हेमंत पांडे को लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार प्रदान किया गया, जबकि छह बच्चों को प्रथम मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार से नवाजा गया।
परेड ग्राउंड में आयोजित समारोह में उत्तराखंड फिल्म नीति-2024 के अंतर्गत वर्ष 2024 और 2025 के लिए चयनित दोनों कलाकारों को उत्तराखंडी सिनेमा एवं कला जगत में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। वर्ष 2024 का लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी और वर्ष 2025 का पुरस्कार अभिनेता हेमंत पांडे को प्रदान किया गया। दोनों कलाकारों को दो-दो लाख रुपये की पुरस्कार राशि और प्रशस्ति पत्र दिया गया। नरेंद्र सिंह नेगी ने अपने लोकगीतों के माध्यम से उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, परंपराओं और सामाजिक सरोकारों को स्वर दिया है। वहीं, अभिनेता हेमंत पांडे ने अपने अभिनय से राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश की पहचान बनाई है।
इसी समारोह में विभिन्न परिस्थितियों में असाधारण साहस और सूझबूझ का परिचय देने वाले छह बच्चों को प्रथम मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 में पहली बार शुरू किए गए इस पुरस्कार के तहत प्रत्येक बच्चे को पदक, प्रशस्ति पत्र और 51 हजार रुपये की धनराशि प्रदान की गई। पुरस्कार राशि डीबीटी के माध्यम से बच्चों के बैंक खातों में हस्तांतरित की गई।
सम्मानित बच्चों में चमोली की दिव्या, दीपिका और आरव सिंह शामिल हैं। तीनों ने 22 दिसंबर 2025 को विद्यालय परिसर में भालू के हमले के दौरान साहस दिखाया था। भालू ने कक्षा छह के छात्र आरव पर हमला कर दिया था। इस दौरान दिव्या ने आरव को बचाने का प्रयास किया, जबकि दीपिका ने अन्य नौ विद्यार्थियों को सुरक्षित कमरे में पहुंचाया।
चम्पावत की माया को नदी के तेज बहाव में फंसी एक बालिका को बचाने के लिए सम्मानित किया गया। भारी बारिश के दौरान नदी में बह रही बालिका को सुरक्षित निकालने के प्रयास में माया स्वयं भी घायल हो गई थीं। देहरादून की आराध्या ने बादल फटने के दौरान खतरे को भांपकर घर में मौजूद 17 लोगों को सतर्क किया और तीन वर्षीय बच्ची को तेज बहाव से बचाया। वहीं, टिहरी गढ़वाल की श्वेता ने तेज गति से आ रहे वाहन की चपेट में आने से एक बुजुर्ग व्यक्ति को समय रहते सड़क किनारे खींचकर उनकी जान बचाई थी।
राज्य सरकार की इन पहलों का उद्देश्य प्रदेश की लोकसंस्कृति, क्षेत्रीय सिनेमा और कला जगत को प्रोत्साहित करने के साथ ही असाधारण साहस दिखाने वाले बच्चों को पहचान और सम्मान देना है। राज्योत्सव समारोह में कलाकारों की उपलब्धियों और बच्चों की बहादुरी को सम्मानित कर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और साहसिक परंपरा को प्रमुखता दी गई।


