उत्तराखंड में लोकायुक्त नियुक्ति मामले पर हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार से चार सप्ताह में रिपोर्ट मांगी……….
नैनीताल: नैनीताल हाईकोर्ट ने लोकायुक्त नियुक्ति की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई की। सरकार की ओर से बताया गया कि नियुक्ति प्रक्रिया गतिमान है और पैनल तैयार किया जा रहा है। इस पर अदालत ने राज्य सरकार को चार सप्ताह में प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।
नैनीताल हाईकोर्ट ने लोकायुक्त की नियुक्ति की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद राज्य सरकार को प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से पूर्व के आदेश के क्रम में रिपोर्ट पेश की गई। जिसमें कहा गया कि लोकायुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया गतिमान है और समिति के सामने लोकायुक्त और उसके सदस्यों का पैनल तैयार कर समिति के सम्मुख रखेगी। इसलिए सरकार को इसके लिए चार सप्ताह का समय दिया जाए।
कोर्ट ने सरकार को चार सप्ताह का समय देते हुई अगली सुनवाई तक प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार हल्द्वानी निवासी रवि शंकर जोशी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सरकार ने अभी तक लोकायुक्त की नियुक्ति नही की है। जबकि संस्थान के नाम पर वार्षिक दो से तीन करोड़ रुपए खर्च हो रहा है। याचिका में कहा कि कर्नाटक में व मध्य प्रदेश में लोकायुक्त द्वारा भ्रष्टाचार के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जा रही है लेकिन उत्तराखंड में तमाम घोटाले हो रहे हैं। हर एक छोटे से छोटा मामला उच्च न्यायालय में लाना पड़ रहा है।
याचिका में कहा कि वर्तमान में राज्य की सभी जांच एजेंसी सरकार के अधीन है, जिसका पूरा नियंत्रण राज्य के राजनैतिक नेतृत्व के हाथों में है। वर्तमान में उत्तराखंड राज्य में कोई भी ऐसी जांच एजेंसी नही है जिसके पास यह अधिकार हो कि वह बिना शासन की पूर्वानुमति के किसी भी राजपत्रित अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार का मुकदमा पंजिकृत कर सके। स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के नाम पर प्रचारित किया जाने वाला विजिलेंस विभाग भी राज्य पुलिस का ही हिस्सा है, जिसका सम्पूर्ण नियंत्रण पुलिस मुख्यालय, सतर्कता विभाग या मुख्यमंत्री कार्यालय के पास ही रहता है। एक पूरी तरह से पारदर्शी, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच व्यवस्था राज्य के नागरिकों के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। इसलिए रिक्त पड़े लोकायुक्त की नियुक्ति शीघ्र की जाए। जिससे कि राज्य में हो रहे भ्रष्टाचार पर रोक लग सके। याचिका में कहा कि मामलों की सुनवाई लोकायुक्त के वहां होगी और न्यायालयों का कार्यभार में कमी आएगी, जबकि यह पद वर्ष 2013 से खाली पड़ा है।


