उत्तराखंड में यहाँ 10 वर्ष में तीन सीएम, दो कुलपति बदले, आज भी ‘पत्थर’ पर आईटी अकादमी……..
हल्द्वानी: दुनिया भर में आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस (एआइ), रोबोटिक्स और मशीन लर्निंग की चर्चा है। उभरती एआइ की तकनीक के जरिये शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव होने लगे हैं। अपने राज्य में भी आधुनिक तकनीक को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने के दावे बहुत हैं।
प्रदेश के 10 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों और 114 राजकीय महाविद्यालयों में भी एआइ संबंधी पढ़ाई के वादे लगातार हो रहे हैं। विडंबना है कि आइटी अकादमी की 10 वर्ष पुरानी घोषणा अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी है। 10 वर्ष पहले उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (यूओयू) में इसकी आधारशिला रखी गई थी।
तब से तीन मुख्यमंत्री बदल चुके हैं। विश्वविद्यालय के दो कुलपति भी कार्यकाल पूरा कर चुके हैं, लेकिन राज्य को सूचना प्रौद्योगिकी (आइटी) के क्षेत्र में सशक्त बनाने वाला संस्थान शिलान्यास से आगे नहीं बढ़ा सका। अब यूओयू परिसर में लगा योजना का पत्थर भी फीका पड़ने लगा है और प्रस्ताव फाइलों में दफन हो गया।
दरअसल, 22 करोड़ रुपये से राज्य की पहली आइटी अकादमी बनाई जानी थी। यूओयू परिसर में तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री डा. इंदिरा हृदयेश ने आठ दिसंबर 2016 को अकादमी का शिलान्यास किया था। इसके बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन हो गया। सरकार बदलने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विश्वविद्यालय में हुए दो अलग-अलग कार्यक्रमों में दोबारा से आइटी अकादमी बनाने की घोषणा की।
इनके बाद सीएम बने तीरथ सिंह रावत ने भी एक कार्यक्रम में अकादमी बनाने का ऐलान किया। वर्ष 2022 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद हुए पहले बजट सत्र में आइटी अकादमी का मुद्दा आया। इसके लिए पांच करोड़ रुपये का प्रारंभिक प्रविधान भी किया गया। इससे योजना के परवान चढ़ने की उम्मीद जगी। वहीं, 2023 में यूओयू के दीक्षा समारोह में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा की। पूर्व में शिलान्यास, मुख्यमंत्री घोषणा में शामिल होने और बजट में प्रविधान किए जाने के बावजूद आइटी अकादमी के नाम का एक पत्थर नहीं रखा गया।
यूओयू प्रशासन लगातार भेजता रहा है शासन को पत्र
यूओयू प्रशासन आइटी अकादमी के निर्माण को लेकर लगातार शासन को अवगत कराता रहा है। वर्तमान समय की मांग और अनुसंधान पर जोर देते हुए प्रस्तावित योजना के लिए बजट उपलब्ध कराने को पत्र लिखते हैं। उच्च शिक्षा निदेशालय से भी इस संबंध में पूर्व में पत्राचार किया गया है। एक वर्ष पूर्व तत्कालीन उच्च शिक्षा सचिव शैलेश बगौली की अध्यक्षता में हुई बैठक में आइटी अकादमी के विषय रखा गया था। इसके बाद इस अहम प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए पहल नहीं हुई। इससे सिस्टम की गंभीरता पर भी सवाल खड़े होते हैं।
आइटी अकादमी बनने से यह होता लाभ
सूचना प्रौद्योगिकी अकादमी बनने से प्रदेश नवाचार और डिजिटल तकनीकी के क्षेत्र में आगे बढ़ेगा। यहां सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों को आधुनिक तकनीकी के अनुसार प्रशिक्षित किए जाने के साथ ही सरकार सिस्टम में डिजिटल तकनीक को और मजबूत किया जा सकेगा। इसके अलावा ग्राफिक डिजाइनिंग, वेब डिजाइनिंग, प्रोग्रामिंग लैंग्वेज, मोबाइल एप डेवलपमेंट, एनिमेशन, वीडियो एडिटिंग, वीडियो गेम डेवलपमेंट, लाइव प्रोजेक्ट ट्रेनिंग में दक्षता हासिल हो सकेगी। साथ ही प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भी अनुसंधान को बल प्राप्त होगा।
आइटी को लेकर हाईस्कूल व इंटर से ही दिख रही रुचि
सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में ज्ञान अर्जन करने को लेकर विद्यार्थियों में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर से ही रुचि दिख रही है। उत्तराखंड बोर्ड के अनुसार इस वर्ष की परीक्षा में इंटर में 486 बच्चों ने कंप्यूटर और 1931 ने इन्फारमेशन टेक्नोलाजी इनेबल्ड सर्विसेज (आइटीईएस) विषय चुना था। वहीं, हाईस्कूल के 7557 विद्यार्थियों ने कंप्यूटर और 5260 ने आइटीईएस की परीक्षा दी थी। वर्ष 2025 के मुकाबले 20 प्रतिशत वृद्धि देखने को मिली थी।
आठ सरकारी कालेजों में ही कंप्यूटर विज्ञान पाठ्यक्रम
समय और उद्योगों की मांग को देखते हुए युवाओं में आइटी संबंधित पाठ्यक्रमों की पढ़ाई को लेकर रुचि बढ़ी है। ऐसे कंप्यूटर विज्ञान कोर्स की डिमांड काफी है, लेकिन प्रदेश में केवल आठ सरकारी कालेजों में ही बीएससी कंप्यूटर विज्ञान की पढ़ाई होती है। इसमें से मात्र एमबीपीजी कालेज में एमएससी कंप्यूटर विज्ञान चल रहा है। इनमें प्रवेश को मारामारी रहती है। इसमें भी 50 प्रतिशत शिक्षक अस्थायी ही हैं।
विश्वविद्यालय परिसर में आइटी अकादमी बनना पूर्व से प्रस्तावित है। संबंधित योजना को लेकर निर्णय शासन स्तर पर प्रतीक्षित है। इसे लेकर प्रयास किए जाएंगे। :प्रो. नवीन चंद्र लोहनी, कुलपति, यूओयू।


