उत्तराखंड में बारिश के बीच महारैली में उमड़ा जनसैलाब, 5 अक्टूबर तक अल्टीमेटम……..
लालकुआं: बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा देने की मांग को लेकर रविवार को भारी बारिश के बीच लालकुआं में हजारों ग्रामीणों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। वन अधिकार संगठन के आह्वान पर शहीद स्मारक, जड़ सेक्टर से शुरू हुई महारैली तहसील परिसर पहुंची। यहां आयोजित जनसभा के दौरान ग्रामीणों ने राजस्व गांव की अधिसूचना जारी करने और गौला नदी से बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान की मांग उठाई। रिपोर्ट के अनुसार रैली में 10 हजार से अधिक ग्रामीण शामिल हुए।
रैली में पूर्व सैनिकों, मातृशक्ति, बुजुर्गों और युवाओं ने बड़ी संख्या में भागीदारी की। तहसील परिसर में आंदोलनकारियों ने अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान किया। इसके बाद मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे। मंत्री ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से दूरभाष पर वार्ता कर ग्रामीणों को मामले के समाधान का भरोसा दिया।
राम सिंह कैड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं बिंदुखत्ता राजस्व गांव के मुद्दे का समाधान चाहते हैं। उन्होंने ग्रामीणों से फिलहाल धरना स्थगित करने की अपील करते हुए कहा कि आगामी 10 से 15 दिनों के भीतर शासन स्तर पर वार्ता कराकर मामले का ठोस समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
मंत्री के आश्वासन के बाद वन अधिकार संगठन ने ग्रामीणों के साथ विचार-विमर्श किया। इसके बाद संगठन अध्यक्ष उमेश भट्ट ने सरकार को 5 अक्टूबर तक का समय देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि निर्धारित समय तक बिंदुखत्ता राजस्व गांव की अधिसूचना जारी नहीं हुई तो तहसील लालकुआं में दोबारा अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि राजस्व गांव की मांग को लेकर शासन और प्रशासन के साथ कई दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं। अब संगठन की मांग केवल वार्ता या आश्वासन तक सीमित नहीं है, बल्कि राजस्व गांव की अधिसूचना जारी किए जाने की है। उन्होंने कहा कि 5 अक्टूबर तक सरकार की ओर से ठोस निर्णय नहीं होने पर आंदोलन को फिर से तेज किया जाएगा।
वन अधिकार संगठन के अनुसार बिंदुखत्ता के 32 गांवों के 11,703 दावेदारों की ओर से वनाधिकार कानून-2006 की धारा 3(1)(ज) के तहत प्रस्तुत सामुदायिक दावे को 19 जून 2024 को जिला स्तरीय वन अधिकार समिति ने सर्वसम्मति से पारित किया था। संगठन का दावा है कि इसके बाद राजस्व गांव की अधिसूचना और बंदोबस्ती की प्रक्रिया के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया, लेकिन अंतिम अधिसूचना अभी जारी नहीं हुई है।
राजस्व गांव का दर्जा बिंदुखत्ता के ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही मांग है। संगठन के अनुसार इसी मांग को लेकर 15 अगस्त से पदयात्रा के जरिए जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा था। रविवार की महारैली को इसी आंदोलन की अगली कड़ी बताया गया।
रैली को देखते हुए प्रशासन ने भी सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। लालकुआं बाजार से तहसील परिसर तक पुलिस बल तैनात रहा और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई।
भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी के बीच फिलहाल धरना 5 अक्टूबर तक स्थगित किया गया है। अब संगठन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय तक अधिसूचना जारी नहीं होने पर तहसील परिसर में अनिश्चितकालीन धरना फिर शुरू किया जाएगा।


