उत्तराखंड में गैरसैंण विधानसभा सत्र के बाद पसरा सन्नाटा, स्थायी विकास की उम्मीदें बरकरार……..

गैरसैंण: ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा परिसर में दो दिन तक रही गतिविधियों की गहमागहमी सत्र के समापन के साथ ही थम गई। मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों, अधिकारियों और कर्मचारियों की आवाजाही से गुलजार रहा परिसर एक बार फिर शांत हो गया।

सदन की कार्यवाही स्थगित होते ही सरकारी काफिला लौट गया और विधानसभा परिसर की चहल-पहल को भी अपने साथ ले गया। सत्र के बाद लौटा सन्नाटा एक बार फिर गैरसैंण में सालभर गतिविधियां बनाए रखने और इसे स्थायी रूप से विकास की धारा से जोड़ने की अपेक्षाओं को इंगित भी कर रहा है। यद्यपि, मुख्यमंत्री धामी कह चुके हैं कि इसे साल भर गुलजार करने के लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं।

भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र के आयोजन के दौरान गैरसैंण एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में रहा। सदन की कार्यवाही, अनुपूरक बजट समेत अहम विधेयकों के पारित होने और प्रशासनिक गतिविधियों के चलते क्षेत्र में विशेष रौनक दिखाई दी। सत्र के दौरान स्थानीय स्तर पर भी हलचल बढ़ी रही। वाहनों की आवाजाही और जनप्रतिनिधियों तथा अधिकारियों की मौजूदगी से सामान्य दिनों की तुलना में क्षेत्र का माहौल बदला रहा।

हालांकि, सत्र की अवधि सीमित होने के कारण यह चहल-पहल भी कुछ समय की ही साबित हुई। कार्यवाही पूरी होने के बाद जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की वापसी शुरू हुई तो विधानसभा परिसर के साथ आसपास के क्षेत्र में भी सन्नाटा पसरने लगा।

दो दिन पहले तक व्यस्त नजर आने वाली सड़कों और परिसर ने सन्नाटे की चादर ओढ़ ली। देखा जाए तो गैरसैंण में विधानसभा सत्र का आयोजन केवल सदन की कार्यवाही तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में क्षेत्र की भूमिका और विकास की अपेक्षाएं भी चर्चा में आती हैं।

स्थानीय लोगों के लिए सत्र के दिन गैरसैंण की अलग पहचान और रौनक लेकर आते हैं। लेकिन सत्र समाप्त होते ही गतिविधियों का सिमट जाना इस सवाल को भी सामने लाता है कि यहां नियमित प्रशासनिक गतिविधियों और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को किस तरह गति मिले। सत्र के बाद लौटा सन्नाटा एक बार फिर गैरसैंण में सालभर गतिविधियां बनाए रखने और इसे स्थायी रूप से विकास की धारा से जोड़ने की अपेक्षाओं को रेखांकित कर रहा है।

प्रतिदिन डेढ़ से दो करोड़ का खर्च
गैरसैंण में विधानसभा सत्र के सफल संचालन के लिए प्रतिदिन अनुमानित डेढ़ से दो करोड़ रुपये का खर्च आता है। इसमें बिजली, पानी से लेकर खाने-पीने और परिवहन का खर्च शामिल हैं। इसके अलावा सत्र के दौरान सुरक्षा व्यवस्था व कार्यवाही के सुचारू संचालन को बड़ी संख्या में सरकारी अमला भी लगाया जाता है।

ऐसे में इनके सत्र के दौरान आने जाने और रहने खाने की व्यवस्था के साथ ही इनको अलग से भोजन भत्ता व रहने का खर्च संबंधित विभाग उठाते हैं। बड़ी संख्या में कार्मिकों की वाहनों से आवाजाही समेत पूरे लाव-लश्कर को मिलाकर यह व्यय दो करोड़ से काफी अधिक हो जाता है। जाहिर है कि इतना खर्च होने के बाद जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की चुनौती भी सरकार के समक्ष रहती है।

विधानसभा भवन में लाइब्रेरी बनने से रौनक लौटने की उम्मीद
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूड़ी की पहल पर भराड़ीसैंण स्थित परिसर में लाइब्रेरी का निर्माण किया जा रहा है। इस लाइब्रेरी को स्थानीय जनता के लिए खोला जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष का कहना है कि इस लाइब्रेरी में यदि स्थानीय युवा रूचि दिखाएंगे तो फिर दिवालीखाल से बच्चों को लाइब्रेरी तक लाने ले जाने के लिए परिवहन सेवाएं भी विकसित की जाएंगी।