उत्तराखंड में अब नई एमएसएमई नीति-2023 से पहाड़ चढ़ेंगे उद्योग, पर्वतीय क्षेत्रों में निवेश पर ₹4 करोड़ तक की रिकॉर्ड सब्सिडी……..

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में लागू ‘एमएसएमई नीति-2023’ के जरिए उत्तराखंड में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार मिल रही है। राज्य में 2015 की पुरानी नीति की जगह आई इस नई नीति का मुख्य लक्ष्य मैदानी क्षेत्रों के मुकाबले दुर्गम और पर्वतीय क्षेत्रों में उद्योगों की स्थापना को सुगम बनाना, रोजगार के अवसर पैदा करना और पहाड़ों से होने वाले पलायन पर प्रभावी रोक लगाना है।

नई नीति के तहत पर्वतीय जिलों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग लगाने के लिए ₹20 लाख से लेकर ₹4 करोड़ तक की सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त, यदि उद्योग में स्थानीय स्तर के कच्चे माल का उपयोग किया जाता है, तो उद्यमियों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी का लाभ दिया जाएगा।

भौगोलिक वर्गीकरण: चार श्रेणियों (A, B, C, D) में बंटे जिले।

औद्योगिक विषमता को दूर करने के लिए प्रदेश के जिलों और विकासखंडों को चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।

ए श्रेणी (पूर्णतः पर्वतीय एवं दुर्गम जिले): पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, चमोली, चंपावत, रुद्रप्रयाग और बागेश्वर जिला।
बी श्रेणी (पर्वतीय भू-भाग): अल्मोड़ा व पौड़ी जिला, टिहरी का पर्वतीय भू-भाग, नैनीताल (भीमताल, धारी, बेतालघाट, रामगढ़, ओखलकांडा) तथा देहरादून का चकराता विकासखंड।

सी श्रेणी (मध्यम पर्वतीय व ढलान क्षेत्र): टिहरी का ढालवाला, तपोवन, मुनी की रेती, फकोट और 800 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले मैदानी क्षेत्र (रायपुर, सहसपुर, विकासनगर, कालसी, डोईवाला) तथा नैनीताल का कोटाबाग।

डी श्रेणी (मैदानी क्षेत्र): हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर का संपूर्ण क्षेत्र, 800 मीटर से कम ऊंचाई वाले नैनीताल के क्षेत्र (रामनगर, हल्द्वानी, लालकुआं), नगर निगम देहरादून आदि।

श्रेणीवार उद्योगों को मिलने वाली सब्सिडी
उद्योग श्रेणी ए श्रेणी बी श्रेणी सी श्रेणी डी श्रेणी
सूक्ष्म उद्योग ₹50 लाख ₹40 लाख ₹30 लाख ₹20 लाख
लघु उद्योग ₹1.60 करोड़ ₹1.20 करोड़ ₹80 लाख ₹60 लाख
मध्यम उद्योग ₹4 करोड़ ₹3 करोड़ ₹2 करोड़ ₹1.50 करोड़
स्टाम्प शुल्क में 100% तक छूट और जेड प्रमाणीकरण पुरस्कार
स्टाम्प ड्यूटी रिफंड: ए व बी श्रेणी के क्षेत्रों में नए उद्योग लगाने पर स्टाम्प शुल्क में 100% की छूट/प्रतिपूर्ति मिलेगी। सी श्रेणी में 75% और डी श्रेणी में 50% स्टाम्प शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ मिलेगा।

जेड (ZED) प्रमाणीकरण पुरस्कार: गुणवत्ता को बढ़ावा देने के लिए ‘जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट’ प्रमाणीकरण पर नकद पुरस्कार का प्रावधान है— गोल्ड प्रमाणीकरण पर ₹75 हजार, सिल्वर पर ₹50 हजार और ब्रॉन्ज प्रमाणीकरण पर ₹25 हजार दिए जाएंगे।

तकनीक व ड्रोन प्रोत्साहन: राज्य में मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और स्किल इंडिया के तहत नवाचारों को बढ़ावा दिया जा रहा है। सीएम धामी के अनुसार, उत्तराखंड की जटिल परिस्थितियों में ड्रोन तकनीक बेहद कारगर है, जिसके लिए राज्य में देश का पहला ड्रोन एप्लीकेशन एंड रिसर्च सेंटर (DARC/डार्क) स्थापित किया गया है।

इस एमएसएमई नीति से सेवा क्षेत्र (होटल, साहसिक खेल, रोपवे, नर्सिंग होम आदि) को बाहर रखा गया है, जिनके लिए सरकार अलग से सेवा क्षेत्र नीति लागू कर रही है।