उत्तराखंड के आदि कैलाश में जम गया पार्वती कुंड, ओम पर्वत पर बिछी बर्फ की चादर, शून्य से नीचे तापमान, टूरिस्ट रोमांचित………
देहरादून: आदि कैलाश और ओम पर्वत क्षेत्र में भारी बर्फबारी के बाद तापमान शून्य से नीचे पहुंच गया है. पौराणिक पार्वती कुंड का पानी पूरी तरह जम गया है, जबकि कई मार्गों पर बर्फ जमा होने से आवाजाही प्रभावित हुई है।
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले स्थित आदि कैलाश और ओम पर्वत क्षेत्र में सितंबर के अंतिम सप्ताह में हुई भारी बर्फबारी का असर अभी भी दिखाई दे रहा है। करीब 4 से 5 फीट तक हिमपात के बाद पूरा उच्च हिमालयी क्षेत्र बर्फ की सफेद चादर में ढक गया है। तापमान शून्य से नीचे पहुंचने के कारण पौराणिक पार्वती कुंड का पानी पूरी तरह जम गया है, जबकि भीम की खेती क्षेत्र भी बर्फ से ढका हुआ है। हालांकि बर्फबारी से कुछ मार्ग बाधित हुए हैं, लेकिन श्रद्धालु और पर्यटक इस दुर्लभ नजारे का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में आदि कैलाश और ओम पर्वत पहुंच रहे हैं।

सितंबर की बर्फबारी ने बदला हिमालय का नजारा
उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में 25 सितंबर से शुरू हुई बर्फबारी का असर अभी भी दिखाई दे रहा है। लगभग चार हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाके बर्फ की मोटी चादर से ढके हुए हैं। पिथौरागढ़ जिले के प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थलों आदि कैलाश तथा ओम पर्वत क्षेत्र में इस बर्फबारी का सबसे अधिक प्रभाव देखा गया है। जानकारी के अनुसार आदि कैलाश क्षेत्र में चार से पांच फीट तक तथा ओम पर्वत क्षेत्र में लगभग दो फीट तक बर्फ जमी हुई है। बर्फबारी के बाद पूरा क्षेत्र सफेद चादर में लिपटा दिखाई दे रहा है, जिससे यहां का प्राकृतिक सौंदर्य और भी आकर्षक हो गया है।
शून्य से नीचे पहुंचा तापमान, जम गया पार्वती कुंड।
लगातार बर्फबारी और ठंड बढ़ने से क्षेत्र का तापमान शून्य से नीचे पहुंच गया है। इसका असर पौराणिक और धार्मिक महत्व वाले पार्वती कुंड पर भी दिखाई दिया है। आदि कैलाश पर्वत के नीचे स्थित पार्वती कुंड का पूरा पानी जम चुका है। वहीं धार्मिक महत्व रखने वाला भीम की खेती क्षेत्र भी कई इंच मोटी बर्फ से ढक गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस समय क्षेत्र में कड़ाके की ठंड पड़ रही है और रात के समय तापमान काफी नीचे चला जाता है।
सड़क मार्गों पर बर्फ, कई जगह प्रभावित हुई आवाजाही
भारी बर्फबारी का असर क्षेत्र के सड़क संपर्क पर भी पड़ा है। आदि कैलाश और ओम पर्वत तक पहुंचने वाले भारत-नेपाल सीमा मार्ग पर कई स्थानों पर बर्फ जमने से यातायात प्रभावित हुआ।
गौरी कुंड से आगे करीब दो किलोमीटर का पैदल मार्ग अभी भी बर्फ से ढका हुआ है। वहीं लिपुलेख जाने वाला सड़क मार्ग भी कई हिस्सों में बंद बताया जा रहा है।

हालांकि सीमा सड़क संगठन (BRO) लगातार मार्गों को खोलने के लिए अभियान चला रहा है। अधिकारियों के अनुसार कुटी से आदि कैलाश तक सड़क से बड़ी मात्रा में बर्फ हटा दी गई है, जिससे यात्रियों और सुरक्षा बलों के वाहनों की आवाजाही में राहत मिली है।
तीन से चार दिन में खुल सकता है लिपुलेख मार्ग
BRO की टीमें लगातार बर्फ हटाने के कार्य में जुटी हुई हैं। कुटी से आदि कैलाश तक का रास्ता काफी हद तक साफ कर दिया गया है। अधिकारियों को उम्मीद है कि यदि मौसम अनुकूल रहा तो अगले तीन से चार दिनों में लिपुलेख सड़क मार्ग भी सुचारु किया जा सकेगा। इससे क्षेत्र में आवागमन और आपूर्ति व्यवस्था सामान्य होने में मदद मिलेगी।
बर्फ के बीच दर्शन कर लौटे यात्री
आदि कैलाश यात्रा पर आए श्रद्धालु इस मौसम को अपने लिए विशेष अनुभव बता रहे हैं। ओडिशा से आए यात्री देवी प्रसाद बेहरा ने बताया कि उनके साथ 23 लोगों का दल आदि कैलाश यात्रा पर पहुंचा था।
यात्रा पूरी करने के बाद लौटे दल ने बताया कि उन्होंने आदि कैलाश, ओम पर्वत, शिव-पार्वती मंदिर, पार्वती कुंड, भीम की खेती, कालापानी माता मंदिर और व्यास गुफा सहित कई महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों के दर्शन किए।
उन्होंने कहा कि पार्वती कुंड और भीम की खेती क्षेत्र में करीब पांच से छह इंच तक बर्फ जमी हुई थी। भारी बर्फबारी के कारण उन्हें पार्वती कुंड में स्नान करने का सौभाग्य नहीं मिल पाया, लेकिन बर्फ से ढके पूरे क्षेत्र का दृश्य बेहद अद्भुत था।
पूजा-अर्चना भी हुई प्रभावित
भारी बर्फबारी का असर आदि कैलाश मंदिर की नियमित पूजा व्यवस्था पर भी पड़ा है। मंदिर के पुजारी गोपाल सिंह कुटियाल और वीरेंद्र सिंह कुटियाल पिछले लगभग दस दिनों से मंदिर तक नहीं पहुंच पाए हैं।
पुजारियों के अनुसार भारी बर्फ के कारण मार्ग अवरुद्ध होने से नियमित पूजा-अर्चना प्रभावित हुई है। हालांकि अब BRO द्वारा रास्ता साफ किए जाने के बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि मौसम ने साथ दिया तो अगले दो से तीन दिनों के भीतर वे मंदिर पहुंचकर नियमित पूजा-अर्चना शुरू कर सकेंगे।


