उत्तराखंड में गोवंशीय पशुओं में लंपी की दस्तक से सरकार अलर्ट, एडवाइजरी जारी……..

देहरादून: उत्तराखंड में गोवंशीय पशुओं में लंपी त्वचा रोग (एलएसडी) की दस्तक को देखते हुए सरकार चौकन्ना हो गई है। नैनीताल, हरिद्वार, पौड़ी, रुदप्रयाग व ऊधम सिंहर जिलों में 52 पशुओं में इस रोग के लक्षण पाए गए हैं। पशुपालन विभाग ने संक्रमित पशुओं से सैंपल लेकर इन्हें जांच के लिए आईवीआरआई (भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान), बरेली भेजा है।

मंगलवार शाम तक इसकी रिपोर्ट मिलने पर साफ होगा कि ये पशु एलएसडी से संक्रमित हैं या फिर अन्य बीमारी से। बावजूद, इसके सरकार इस विषय को बेहद गंभीरता से ले रही है। पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा के निर्देश पर विभाग ने एलएसडी की रोकथाम व नियंत्रण को एडवाइजरी जारी कर दी है।

पशुपालन निदेशालय में सोमवार से कंट्रोल रूम भी शुरू कर दिया गया। उत्तर प्रदेश से सटे उत्तराखंड के जिलों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। पशुपालन मंत्री बहुगुणा के अनुसार एलएसडी संक्रमण की आशका के दृष्टिगत विभाग को हर स्तर पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

साथ ही अभियान चलाकर गोवंशीय पशुओं का शत-प्रतिशत टीकाकरण करने, इस रोग पर नियंत्रण को प्रभावी कदम उठाने, प्रभावित पशुओं काे समुचित उपचार मुहैया कराने, स्थानीय नगर व ग्रामीण निकायों के साथ समन्वय कर नियमित फागिंग, कीटनाशकों व चूने का छिड़काव कराने का निर्देश दिया गया है।

पशुपालकों को अपने गोवंशीय पशुओं को इस रोग के लक्षण और बचाव की जानकारी देने के लिए निर्देशित किया गया है। पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. उदय शंकर ने बताया कि सभी जिलों के मुख्य पशु चिकित्साधिकारियों को एडवाइजरी के अनुरूप कदम उठाने को कहा गया है।

संक्रमित पशु को अन्य से रखें अलग
डॉ. उदय शंकर ने बताया कि एलएसडी का संक्रमण केवल गोवंशीय पशुओं में ही होता है। तेज बुखार, मुंह से लार निकलना, त्वचा पर चकते व गांठे निकलना और सूजन आना इस रोग के लक्षण हैं। संक्रमित पशुओं को अन्य पशुओं से अलग रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी जिलों में इसके दृष्टिगत विभागीय टीमों को सक्रिय कर दिया गया है। टीकाकरण अभियान में और तेजी लाने को कहा गया है।