उत्तराखंड हाई कोर्ट शिफ्टिंग: गौलापार में काटने पड़ेंगे 4238 पेड़, हल्द्वानी का ये एरिया ज्यादा मुफीद………

हल्द्वानी: नैनीताल से हाई कोर्ट के हल्द्वानी शिफ्टिंग को लेकर आम चर्चा है कि नई जगह गौलापार होगी, लेकिन इस अहम प्रोजेक्ट को लेकर रामपुर रोड स्थित बेलबाबा के पास संभावनाएं ज्यादा हैं।

गौलापार में 26 हेक्टेयर वनभूमि पर निर्माण शुरू करने से पहले 4238 पेड़ों का कटान करना पड़ेगा, जबकि बेलबाबा से जुड़े जंगल में आयु पूरी होने की वजह से वन विभाग पहले ही हजारों की संख्या में पेड़ कटवा चुका है।

गौलापार की बजाय इस मैदाननुमा भूमि पर हाई कोर्ट का निर्माण ज्यादा आसान होगा। करीब तीन महीने पूर्व प्रशासनिक अफसरों की टीम ने बेलबाबा का निरीक्षण कर रिपोर्ट भी तैयार की थी। हालांकि अंतिम मुहर को लेकर शासन के आदेश का इंतजार अभी बाकी है।

बेलबाबा का निरीक्षण कर रिपोर्ट भी तैयार
राज्य गठन के बाद देहरादून को अस्थायी राजधानी बनाया गया तो नैनीताल में हाई कोर्ट की स्थापना हुई। नवंबर 2022 में कैबिनेट ने हाई कोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी शिफ्ट करने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी तो अफसरों ने शहर से जुड़ी अलग-अलग जगहों का निरीक्षण शुरू कर दिया।

शुरूआत गौलापार से हुई। यहां तराई पूर्वी वन प्रभाग से जुड़ी गौला रेंज की 26 हेक्टेयर भूमि को चिन्हित किया गया। इसमें आइएसबीटी प्रोजेक्ट से जुड़ी पुरानी जमीन भी शामिल थी। इसके बाद गौलापार में वनभूमि के हस्तांतरण को लेकर प्रक्रिया शुरू की गई।

सीमांकन के दौरान पता चला कि शीशम, खैर, नीम, सेमल, बेल, अमलतास आदि प्रजाति के 4238 पेड़ों का कटान करना होगा, लेकिन बाद में वनभूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव केंद्री की हाई इम्पावर्ड समिति ने खारिज कर दिया था। वहीं, करीब तीन माह पूर्व प्रशासनिक अफसरों ने रामपुर रोड बेलबाबा के पास जमीन देखी, जहां पेड़ों के कटान की वजह से मैदाननुमा भूमि भी नजर आ गई।

गौलापार में जहां वनभूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करने के साथ ही पेड़ों के कटान की अनुमति लेने की भी जरूरत है। वहीं, बेलबाबा में केवल जमीन के लिए आवेदन करना होगा। ऐसे में बेलबाबा के पास हाई कोर्ट शिफ्टिंग की संभावना ज्यादा लग रही है।

राजस्व जमीन पर बरसाती नाला बन गया संकट
2024 में संयुक्त टीम ने हाई कोर्ट के निर्माण के लिए राजस्व भूमि की तलाश शुरू की थी, जिसके बाद चौसला क्षेत्र का निरीक्षण किया गया। यहां राजस्व की 10.790 हेक्टेयर खाली भूमि है। बकाया भूमि आसपास स्थित वन क्षेत्र से ली जाती, लेकिन राजस्व भूमि के बीच से भाखड़ा नदी में मिलने वाला बरसाती नाले की वजह से मामला अटक गया।

बेलबाबा में काटे गए थे 41 हजार पेड़
बेलबाबा में 121 हेक्टेयर वनभूमि से जुड़े 41 हजार पेड़ों को वन विभाग ने अनुमति के बाद वन निगम से कटान करवाया था। सागौन और खैर प्रजाति से जुड़े इन पेड़ों की उम्र 50 वर्ष के आसपास थी। फारेस्ट के अनुसार कमर्शियल प्लांटटेशन के आधार पर ही पेड़ों का कटान किया गया। छपान के बाद आगे की जिम्मेदारी वन निगम को सौंपी गई। बिक्री से सरकार को 73.10 करोड़ का राजस्व मिला था।

बेलबाबा के पास अभी 64 हेक्टेयर लैंड
2025 में मानसून सीजन के बाद 121 हेक्टेयर लैंड से पेड़ों का कटान किया गया। विभागीय जानकारी के अनुसार तीन माह पूर्व टीम ने भाखड़ा रेंज से जुड़े प्लाट संख्या 46 और 47 का निरीक्षण किया था। रेंज से जुड़े इन दो हिस्सों में करीब 64 हेक्टेयर जमीन खाली पड़ी है। वनभूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया रेंज से शुरू होकर डिवीजन, सर्किल कार्यालय और मुख्यालय तक पहुंचेगी। इसके बाद नोडल स्टेट से केंद्रीय वन मंत्रालय के पास आवेदन पहुंचेगा। अंतिम निर्णय मंत्रालय का होगा।

बेलबाबा में लगी मुहर तो गौलापार में जगेगी आइएसबीटी की उम्मीद
गौलापार में आठ हेक्टेयर फारेस्ट लैंड ट्रांसफर होने के बाद 2026 में आइएसबीटी का निर्माण शुरू हुआ था, लेकिन 75 करोड़ की लागत वाला यह प्रोजेक्ट मई 2017 में बंद हो गया। इसके बाद राज्य सरकार को वन विभाग को उसकी जमीन भी वापिस करनी पड़ गई। वहीं, गौलापार में हाई कोर्ट शिफ्टिंग को लेकर पूर्व में हुए सर्वे के दौरान चिन्हित 26 हेक्टेयर भूमि में आइएसबीटी वाला क्षेत्र भी शामिल किया गया था।

दूसरी तरफ इसी वर्ष शासन के निर्देश पर परिवहन विभाग और परिवहन निगम के अफसरों ने आइएसबीटी निर्माण को लेकर हल्द्वानी में कई जगहों का निरीक्षण किया था। भूमि सर्वे को लेकर यह टीम गौलापार में पुरानी जगह पर भी पहुंची। शासन को भेजी रिपोर्ट में पुराने स्थल का जिक्र भी किया गया। अगर बेलबाबा में हाई कोर्ट शिफ्टिंग पर मुहर लगती है तो गौलापार में पुन: आइएसबीटी की संभावना जग सकती है।