उत्तराखंड में कर्णप्रयाग विवाद मामले में निहंग सिखों को मिली जमानत……….

गोपेश्वर: उत्तराखंड के चर्चित कर्णप्रयाग निहंग मारपीट प्रकरण में चारों निहंग सिखों को बड़ी राहत मिली है। गोपेश्वर जिला न्यायालय में जिला एवं सत्र न्यायाधीश बिंध्याचल सिंह की अदालत ने शनिवार को चारों आरोपियों की जमानत मंजूर कर दी।

मिली जानकरी के अनुसार, आरोपितों को पचास-पचास हजार रुपये के दो जमानती पेश करने पर जेल से रिहा किया जाएगा। जिन आरोपितों को जमानत मिली है, उनमें सतविंदर सिंह, अजय सिंह, जसप्रीत सिंह और मनप्रीत सिंह शामिल हैं।

कोर्ट के इस फैसले के बाद मामले को लेकर प्रदेश में चल रहा तनाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि आरोपियों को जमानत मिलने के बावजूद मामले की सुनवाई जारी रहेगी और कानूनी प्रक्रिया नियमानुसार आगे बढ़ेगी।

16 जून को हुआ था कर्णप्रयाग में विवाद
गौरतलब है कि 16 जून 2026 को चमोली जिले के कर्णप्रयाग में निहंग सिखों और स्थानीय लोगों के बीच विवाद हिंसक झड़प में बदल गया था। घटना के बाद पुलिस ने हमला करने के आरोप में चार निहंगों के खिलाफ जान से मारने के प्रयास सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था।

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई भड़काऊ और विवादित पोस्ट वायरल हुईं, जिससे प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में तनाव का माहौल बन गया था।

प्रशासन और निहंग प्रतिनिधियों के बीच हुई वार्ता
कर्णप्रयाग प्रकरण को लेकर शुक्रवार को उत्तराखंड प्रशासन और निहंग सिख समुदाय के प्रतिनिधियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई। दोनों पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई इस वार्ता में शांति बनाए रखने और बातचीत के माध्यम से विवाद का समाधान निकालने पर सहमति बनी।

बैठक के दौरान निहंग प्रतिनिधियों ने प्रशासन के समक्ष चार प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें दर्ज मुकदमा वापस लेने, गिरफ्तार निहंगों से मिलने की अनुमति और अन्य संबंधित मांगें शामिल थीं।

प्रशासन ने मांगा दो दिन का समय
प्रशासन ने निहंग प्रतिनिधियों की मांगों पर विचार करने के लिए दो दिन का समय मांगा और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी कि निहंग समुदाय के प्रतिनिधि फिलहाल दो दिनों तक पांवटा साहिब में ही रुकेंगे।

मामले पर आगे क्या?
चारों निहंगों को जमानत मिलने के बावजूद कर्णप्रयाग मारपीट मामले की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी। प्रशासन भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है, जबकि सुरक्षा एजेंसियां किसी भी प्रकार की अफवाह या तनावपूर्ण स्थिति से निपटने के लिए सतर्क हैं।