उत्तराखंड में पीएम मोदी के बाद अब सीएम धामी की ऊर्जा बचत और स्वदेशी अपनाने की अपील…..

देहरादून: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा संसाधनों की सप्लाई प्रभावित होने के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद अब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी लोगों से ऊर्जा बचत और स्वदेशी अपनाने की अपील की है।

सीएम धामी ने कहा कि राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखते हुए ऊर्जा संसाधनों की बचत करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने जनता से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग बढ़ाने और एक साल तक सोने की खरीद से बचने की अपील की।

पीएम मोदी ने तेलंगाना रैली में दिया था संदेश
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद में आयोजित भाजपा की एक रैली को संबोधित करते हुए पश्चिम एशिया संकट के कारण विदेशी मुद्रा बचाने और ऊर्जा संसाधनों के सीमित उपयोग पर जोर दिया था।

पीएम मोदी ने लोगों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने,मेट्रो रेल और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग बढ़ाने,कारपूलिंग अपनाने, इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल करने,पार्सल परिवहन के लिए रेलवे का उपयोग करने,वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने जैसे कदम उठाने की अपील की थी।

इसके अलावा प्रधानमंत्री ने एक साल तक सोने की खरीद और अनावश्यक विदेश यात्राओं को टालने का भी आह्वान किया।

सीएम धामी बोले- छोटे संकल्प देश की अर्थव्यवस्था को देंगे मजबूती

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यदि सभी नागरिक छोटे-छोटे संकल्प लें, तो यह देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में बड़ा योगदान साबित होगा।

उन्होंने कहा कि अनावश्यक विदेश यात्राएं टालें,स्थानीय और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दें,ऊर्जा की बचत करें,खाद्य तेल का सीमित उपयोग करें,रासायनिक उर्वरकों की जगह प्राकृतिक खाद अपनाएं,सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करें तो यह आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करेगा।

सीएम धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड के नागरिक हमेशा राष्ट्रहित में अग्रणी रहे हैं। उन्होंने ‘वोकल फॉर लोकल’ और आत्मनिर्भर भारत अभियान को सफल बनाने के लिए लोगों से सक्रिय भागीदारी की अपील की।

उन्होंने विश्वास जताया कि उत्तराखंड की जनता प्रधानमंत्री के आह्वान को जन आंदोलन का रूप देगी।

पश्चिम एशिया संकट का असर ऊर्जा बाजार पर
विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने से कई देशों में ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है।

ऐसे में भारत सरकार ऊर्जा संरक्षण और विदेशी मुद्रा बचाने पर विशेष जोर दे रही है।