आइये जानते है वेद दीपक कुमार से “पित्त की थैली में पथरी होने पर घबराने की जरूरत नहीं है, उसके उपाय”……..

हरिद्वार: मानव शरीर में 1 दर्जन से अधिक ऑर्गन है जिनका कार्य पाचक रसों हार्मोन या अन्य किसी जीवन द्रव्य विजातीय द्रव्य को एकत्रित करके रखना होता है इन्हें होलो ऑर्गन कहा जाता है हमारा आमाशय (Stomach ), मूत्राशय (यूरिन ब्लेडर) पित्ताशय अर्थात गॉलब्लेडर ऐसे ही थैला नुमा अंग है| बात पित्त की थैली (पित्ताशय) की करते हैं

पित्त की थैली हमारे यकृत( liver) के दाहिने हिस्से के नीचे स्थित होती है 4 इंच लंबी 2 इंच व्यास की नाशपाती के आकार की यह थैली 30 से लेकर 50ml पित्त अर्थात bile को प्रतिदिन स्टोर करती है।

अब प्रश्न उठता है यह पित्त को स्टोर करती है तो पित्त बनता कहा है | हमारे शरीर का सबसे बड़ा ऑर्गन लगभग 1350 ग्राम वजनी हमारे शरीर की केमिकल फैक्ट्री लीवर पित्त का निर्माण करता है हमारा लीवर 500 से लेकर 1000 ml पित्त प्रतिदिन बनाता है। पित्त छारीय हरा पीला द्रव होता है। जिसकी बदौलत हम फैट वसा को पचा पाते हैं दूध रसमलाई खोवा कचोरी जितना भी ताला भुना खाते है।

सबको छोटी आत में पित्त ठिकाने लगाकर शरीर के लिए ऊर्जा में रूपांतरित करता है, जैसे ही आहार नाल के रास्ते आमाशय से होते हुए कोई भी चिकनाई फैटी फूड छोटी आंत में पहुंचता है तो छोटी आंत की सतह पर बनने वाला विशेष हार्मोन पित्त की थैली को सूचना देता है पित्त की थैली आवश्यक मात्रा में को छोटी आंत की ओर पित्त की नली के माध्यम से पित्त को डिस्चार्ज कर देती है| वसा का पाचन शुरू हो जाता है।

यह एकदम निराली व्यवस्था होती है। पित्त की थैली पित्त को स्टोरी नहीं करती पित्त को विशेष गाढ़ा कंसंट्रेटेड भी करती है। अधिकांश लोगों को पित्त की थैली में पथरी की शिकायत हो जाती है इसका कारण देर सवेर भोजन करना आहार में मांसाहार का सेवन या नाम मात्र की चिकनाई का सेवन करना। जीरो साइज फिगर के चक्कर या सिक्स पैक एब्स निकालने के चक्कर में पित्त की थैली में पथरी होती है।

सफेद कोट अर्थात डॉक्टर बड़े चाव से ऐसे रोगी का अल्ट्रासाउंड करते हैं और फिर से उसे डरा कर कहते हैं कभी भी आप की थैली फट सकती है सीरियस इंफेक्शन हो सकता है हम कुछ नहीं कह सकते आपको पित्त की थैली निकलवा नी पड़ेगी अर्थात गॉलब्लैडर रिमूवल सर्जरी करानी पड़ेगी।

1 से 2 घंटे के ऑपरेशन में डॉक्टर पित्त की थैली को निकाल देते हैं लीवर में बनने वाले पित्त को सीधे छोटी आत से कनेक्ट कर देते हैं।

अब आप विचार कीजिए पित्त की थैली जरूरत के हिसाब से पित्त को छोटी आंत में भेजती है जिन लोगों की पित्त की थैली डॉक्टर निकाल देता है 10, 20 ,50 हजार के लालच में अब पित्त की थैली लीवर और छोटी आंत के बीच नहीं रही तो ऐसे में भारी मात्रा में पित्त सीधा छोटी आत में गिरता है ऐसे व्यक्ति को जिसकी पित्त की थैली निकल गई है जीवन भर कभी दस्त तो कभी कब्ज बदहजमी गैस की शिकायत रहती है| कभी-कभी तो पित्त पेट में लीक होने लगता है।

पित्त की थैली में पथरी होने पर घबराने की जरूरत नहीं है, हमारी पित्त की थैली 80 फ़ीसदी भी यदि पत्थरों से भर जाती है तब तक कोई समस्या नहीं होती व्यक्ति को पता भी नहीं चलता यह बात डॉक्टर भी भली-भांति जानते हैं साथ ही आयुर्वेद में पित्त पापड़ा तथा पत्थर चूर जैसी जड़ी बूटियां है जिनके सेवन से पित्त की थैली की पथरी को बना पित्त की थैली के ऑपरेशन के खत्म किया जा सकता है।

हमें आवश्यकता है अपनी स्वदेशी निरापद परंपरागत आयुर्वेदिक चिकित्सक पद्धति को पहचानने और परखने की। जो खराब अंग को ठीक कर उसे पुनर्जीवित कर देती है ना कि उस अंग को काट कर शरीर से ही बाहर निकाल दिया जाए।

भले ही उसके निकलने से हमारा जीवन चलता रहे क्योंकि मॉडर्न मेडिकल साइंस उन्हें विटल ऑर्गन नहीं मानती मस्तिष्क हृदय लीवर किडनी की तरह। लेकिन भगवान की बनाई हर रचना शरीर के अंग प्रत्यंग बेशकीमती बहु उपयोगी हैं, भगवान यदि पित्त की थैली को बनाना जरूरी ना समझता तो वह सीधे यकृत की पित्त वाहिकाओं को छोटी आत से जोड़ देता।