उत्तराखंड के हरिद्वार में जन्म 2008 का, अस्पताल 2015 में बना, फर्जी जन्म प्रमाण पत्र का भंडाफोड़………

हरिद्वार: हरिद्वार जिले में जन्म प्रमाण पत्र से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि एक बच्ची के जन्म का प्रमाण पत्र ऐसे अस्पताल के नाम पर बनवाया गया, जो उस समय अस्तित्व में ही नहीं था। मामला उजागर होने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।

जिले के डीएम मयूर दीक्षित ने पहले ही अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दे रखे हैं कि किसी भी स्तर पर फर्जी प्रमाण पत्र जारी न हों। ऐसे मामलों में लापरवाही या धोखाधड़ी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

बहादराबाद ब्लॉक से सामने आई शिकायत
जिला पंचायत राज अधिकारी अतुल प्रताप सिंह के अनुसार विकासखंड बहादराबाद क्षेत्र में गलत तरीके से जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जाने की शिकायत मिली थी। मामले की जांच के बाद ग्राम पंचायत विकास अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया जाए।

2008 का जन्म, लेकिन अस्पताल 2015 में बना।
जानकारी के मुताबिक पावधोई स्थित राम रहीम कॉलोनी, ज्वालापुर निवासी शाहीन (पत्नी उस्मान) और उस्मान (पुत्र मोहम्मद इकबाल) ने ग्राम पंचायत विकास अधिकारी को आवेदन देकर बताया था कि उनकी बेटी अक्षा का जन्म 1 मार्च 2008 को जया मैक्सवेल हॉस्पिटल, अतमलपुर बोंगला में हुआ था। उन्होंने यह भी कहा कि पहले जारी किया गया जन्म प्रमाण पत्र खो गया है और आधार कार्ड अपडेट कराने के लिए उन्हें बारकोड वाला ऑनलाइन प्रमाण पत्र चाहिए।

आवेदन के साथ वर्ष 2009 में जारी हस्तलिखित जन्म प्रमाण पत्र की कॉपी और आधार व मतदाता पहचान पत्र की प्रतियां भी जमा कराई गईं। इन दस्तावेजों के आधार पर ग्राम पंचायत विकास अधिकारी ने 18 फरवरी 2026 को सीआरएस पोर्टल के माध्यम से अक्षा का जन्म प्रमाण पत्र ऑनलाइन जारी कर दिया।

शिकायत के बाद खुला फर्जीवाड़ा
कुछ समय बाद एक व्यक्ति ने संबंधित अधिकारी को सूचना दी कि प्रस्तुत किया गया जन्म प्रमाण पत्र संदिग्ध है। इसके बाद मामले की जांच शुरू की गई। जांच में सामने आया कि जिस जया मैक्सवेल हॉस्पिटल में वर्ष 2008 में जन्म होना बताया गया है, वह अस्पताल उस समय बना ही नहीं था। रिकॉर्ड के अनुसार यह अस्पताल वर्ष 2015 में स्थापित हुआ था। इससे स्पष्ट हो गया कि पहले दिया गया प्रमाण पत्र फर्जी था और उसी आधार पर ऑनलाइन प्रमाण पत्र जारी कराया गया। मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश