उत्तराखंड सरकार का बड़ा कदम, उत्तराखंड के 141 स्कूलों में बनेंगे बालिका टॉयलेट…….

देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए बुनियादी सुविधाएं मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य के उन सभी सरकारी विद्यालयों में, जहां अभी तक बालिकाओं के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं है, वहां नए शौचालयों का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए सरकार ने 5 करोड़ 34 लाख 39 हजार रुपये की धनराशि स्वीकृत कर दी है।

प्रदेश के 11 जिलों में स्थित कुल 141 राजकीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं, जहां अभी तक बालिकाओं के लिए शौचालय उपलब्ध नहीं हैं। इन सभी स्कूलों में सुरक्षित शौचालयों का निर्माण युद्धस्तर पर कराया जाएगा, ताकि छात्राओं को पढ़ाई के दौरान किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार स्कूलों में छात्र-छात्राओं को आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि विद्यालयों में फर्नीचर, स्वच्छ पेयजल और शौचालय जैसी सुविधाओं को अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जा रहा है। मंत्री के अनुसार, छात्राओं के लिए सुरक्षित शौचालय की उपलब्धता अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए इस दिशा में विशेष प्राथमिकता के साथ काम किया जा रहा है।

सरकार द्वारा जारी योजना के तहत रुद्रप्रयाग और बागेश्वर जिले के 7-7 विद्यालयों में, पिथौरागढ़ और उधम सिंह नगर में 6-6 विद्यालयों में, नैनीताल में 25, देहरादून में 16, उत्तरकाशी में 10, चंपावत में 5, अल्मोड़ा में 4 और पौड़ी जिले में 2 विद्यालयों में बालिकाओं के लिए शौचालय बनाए जाएंगे। वहीं टिहरी जिले में सबसे अधिक 53 विद्यालयों में यह सुविधा विकसित की जाएगी।

शिक्षा मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी चयनित विद्यालयों में 31 मार्च तक निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाए और इसकी प्रगति रिपोर्ट निदेशालय को भेजी जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि तय समयसीमा में कार्य पूरा न होने पर संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) को जिम्मेदार माना जाएगा।

इस बीच यू-डायस के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के सरकारी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में कुल 1640 शौचालय वर्तमान में बंद पड़े हैं। इनमें 1560 प्राथमिक विद्यालयों और 80 माध्यमिक विद्यालयों के शौचालय शामिल हैं। सरकार ने सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन निष्क्रिय शौचालयों को भी 31 मार्च तक दुरुस्त कर छात्रों के उपयोग के लिए चालू किया जाए।