उत्तराखंड में महायोजना-2041 में देरी: हरिद्वार के सुनियोजित शहरी विकास पर संकट, सुविधाओं की व्यवस्था चुनौती……..

हरिद्वार: शहर के सुनियोजित विकास की रूपरेखा तय करने वाली हरिद्वार महायोजना-2041 शासन की मंजूरी के इंतजार में है। आपत्तियों और सुझावों के निस्तारण के बाद भी महायोजना लागू नहीं हो पाई है। इस बीच शहर के बाहरी क्षेत्रों में आवासीय कालोनियां विकसित हो रही हैं। नियोजित विकास की रूपरेखा लागू होने में देरी से इन क्षेत्रों में सड़क, नाली और जल निकासी जैसी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था करना चुनौती बन सकता है।

महायोजना का उद्देश्य शहर व्यवस्थित विस्तार और भविष्य की जरूरतों के अनुसार आवासीय, व्यावसायिक व अन्य गतिविधियों के लिए भूमि का उपयोग तय करना है। इससे विकास कार्यों को दिशा मिलेगी। फिलहाल, महायोजना को शासन की स्वीकृति का इंतजार है। हरिद्वार के बाहरी क्षेत्रों में नई कालोनियां बनने के साथ ही सड़क और जल निकासी जैसी सुविधाओं की जरूरत बढ़ रही है।

यदि शुरुआती चरण में ही इन कालानियों में बरसात के पानी की निकासी के लिए पर्याप्त जगह और व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई तो आगे चलकर परेशानी बढ़ सकती है। कई स्थानों पर मकान और दूसरी संरचनाएं बनने से पानी की निकासी का विकल्प सीमित हो जाएगा।

ऐसी स्थिति में नए नाले बनाने या जल निकासी की व्यवस्था सुधारने के लिए अतिरिक्त भूमि और धन की जरूरत पड़ सकती है। वर्षा के दौरान पानी भरने की समस्या स्थानीय निवासियों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। गढ़वाल मंडलायुक्त आनंद स्वरूप का कहना है कि महायोजना शासन स्तर पर है। जिसको लेकर कार्यवाही गतिमान है।

करीब 350 आपत्ति और सुझाव मिले थे
महायोजना के प्रारूप पर आमजन से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे। करीब 350 आपत्तियां और सुझाव मिले थे। इनके निस्तारण के बाद महायोजना को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़नी थी। अब इसे लागू करने के लिए शासन की स्वीकृति महत्वपूर्ण है। महायोजना में भूमि के उपयोग और शहर के भविष्य के विस्तार को ध्यान में रखकर विकास की दिशा तय की जाती है।

इससे आवासीय क्षेत्रों के साथ सड़क, जल निकासी और अन्य सुविधाओं के लिए जरूरी स्थान की योजना बनाने में मदद मिलती है। समय पर योजना लागू होने से नए क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की जरूरत का आकलन करना भी आसान होता है। महायोजना लागू होने में देरी के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि तेजी से बढ़ती बसावट के अनुरूप सुविधाओं की व्यवस्था कैसे सुनिश्चित की जाएगी।