उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में नवरात्रि के पहले दिन आज खुलेंगे पाताल भुवनेश्वर गुफा के द्वार, होंगे दर्शन………
पिथौरागढ़: शारदीय नवरात्रि के पहले दिन रविवार से विश्व प्रसिद्ध पाताल भुवनेश्वर गुफा के द्वार श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए फिर से खुल जाएंगे। करीब दो माह से बंद इस धार्मिक स्थल के खुलने से मां भगवती के भक्तों और भगवान शिव के दर्शन की कामना लेकर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी। नवरात्रि के पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए मंदिर कमेटी ने आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं।
पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट क्षेत्र में स्थित पाताल भुवनेश्वर गुफा धार्मिक आस्था के साथ अपनी अद्भुत प्राकृतिक संरचना के लिए भी देशभर में प्रसिद्ध है। गुफा के बंद रहने से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन गतिविधियां प्रभावित हो रही थीं। अब इसके दोबारा खुलने से श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने और स्थानीय पर्यटन कारोबार को गति मिलने की उम्मीद है।
नवरात्रि पर दर्शन के लिए पहुंचेंगे श्रद्धालु
शारदीय नवरात्रि के शुभारंभ के साथ ही प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने लगती है। ऐसे में पाताल भुवनेश्वर गुफा के कपाट खुलने से यहां पहुंचने वाले भक्तों को विशेष अवसर मिलेगा। मंदिर कमेटी ने पहले दिन संभावित भीड़ को देखते हुए व्यवस्थाएं पूरी करने की बात कही है।
पाताल भुवनेश्वर मंदिर कमेटी की अध्यक्ष नीलम भंडारी के अनुसार, गुफा को खोलने की पूरी तैयारी कर ली गई है। उन्होंने बताया कि गुफा के भीतर ऑक्सीजन का स्तर कम होने की स्थिति से निपटने के लिए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मशीन लगाने की व्यवस्था भी की जाएगी। नवरात्रि के पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को ध्यान में रखते हुए आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।
भगवान शिव से जुड़ी हैं धार्मिक मान्यताएं
पाताल भुवनेश्वर को भगवान शिव के प्रमुख पवित्र स्थलों में गिना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुफा के भीतर भगवान शिव सहित अनेक देवी-देवताओं का वास माना जाता है। स्कंद पुराण के मानसखंड में भी इस क्षेत्र के धार्मिक महत्व का उल्लेख मिलता है। श्रद्धालु यहां दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए दूर-दूर से पहुंचते हैं।
गुफा के भीतर प्राकृतिक चट्टानों से बनी विभिन्न आकृतियों को भक्त धार्मिक मान्यताओं के आधार पर देवी-देवताओं, नागों और पौराणिक प्रसंगों से जोड़कर देखते हैं। इन आकृतियों के कारण यह स्थल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र होने के साथ ही एक विशिष्ट आध्यात्मिक अनुभव का स्थान भी माना जाता है।
प्राकृतिक संरचना बनाती है इसे खास
समुद्र तल से लगभग 1,350 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पाताल भुवनेश्वर गुफा चूना पत्थर से बनी प्राकृतिक संरचना है। धरती के भीतर स्थित इस गुफा में पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को संकरे रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। अंदर चट्टानों की प्राकृतिक बनावट और विभिन्न आकृतियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।
गुफा की संरचनाएं प्राकृतिक भूगर्भीय प्रक्रियाओं से विकसित हुई हैं, जबकि उनके धार्मिक स्वरूप और पहचान को लेकर अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। यही विशेषता इसे धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ प्राकृतिक और भूगर्भीय संरचनाओं में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए भी महत्वपूर्ण बनाती है।
गुफा बंद होने से प्रभावित हुआ पर्यटन कारोबार
पाताल भुवनेश्वर गुफा आसपास के क्षेत्र में पर्यटन और स्थानीय रोजगार का महत्वपूर्ण आधार है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों से होटल, होमस्टे, टैक्सी संचालकों, दुकानदारों और अन्य स्थानीय कारोबारियों को काम मिलता है। करीब दो माह तक गुफा बंद रहने से इन गतिविधियों पर असर पड़ा। अब गुफा खुलने से स्थानीय व्यवसायियों को कारोबार बढ़ने की उम्मीद है।
बरसात के मौसम में गुफा के भीतर ऑक्सीजन का स्तर कम होने की आशंका के चलते सुरक्षा और आवश्यक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखकर इसे बंद किया जाता है। इस वर्ष भी 11 अगस्त से गुफा में श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद था। इससे पहले गुफा में सौंदर्यीकरण कार्य के लिए भी इसे बंद किया गया था।
सड़क मार्ग से पहुंच सकते हैं श्रद्धालु
पाताल भुवनेश्वर गुफा पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट क्षेत्र में स्थित है। यहां पहुंचने के लिए सड़क मार्ग प्रमुख साधन है। पिथौरागढ़, बेरीनाग और अल्मोड़ा की ओर से गंगोलीहाट होते हुए गुफा तक पहुंचा जा सकता है। हल्द्वानी और काठगोदाम से आने वाले पर्यटक भी सड़क मार्ग के जरिए इस धार्मिक स्थल की यात्रा कर सकते हैं।
नवरात्रि के पहले दिन गुफा के द्वार खुलने के साथ ही श्रद्धालुओं को दोबारा दर्शन का अवसर मिलेगा। इससे क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों के साथ पर्यटन कारोबार को भी रफ्तार मिलने की उम्मीद है।


