उत्तराखंड में ‘एक जिला-एक नदी’ कार्यक्रम से 13 नदियों को मिलेगा नया जीवन…….

देहरादून: उत्तराखंड में प्राकृतिक जलस्रोतों और नदियों को पुनर्जीवन देने की मुहिम अब तेज की जा रही है। इस कड़ी में जलागम विभाग के अंतर्गत गठित स्प्रिंग एंड रिवर रिज्युविनेशन अथारिटी (सारा) ने ‘एक जिला-एक नदी’ कार्यक्रम में प्रत्येक जिले में एक-एक नदी का चयन किया है।

अभी तक 11 नदियों की कार्ययोजना को धरातल पर मूर्त रूप देने के लिए 44 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। स्थानीय निवासियों को विश्वास में लेकर नदी संरक्षण के कार्य होंगे। कार्यों की प्रगति और कार्यों की गुणवत्ता पर नजर रखने को विशेषज्ञ नियुक्त कर दिए गए हैं।

नदी संरक्षण को एक से तीन साल की कार्ययोेजनाओं का उद्देश्य नदियों के जल प्रवाह को बनाए रखने के साथ ही उनके जलागम क्षेत्रों को सशक्त करना है। इसके लिए जलसमेट क्षेत्रों में चाल-खाल, डैम, खंती, तालाब, पौधारोपण समेत जल संरक्षण से जुड़ी संरचनाओं के निर्माण के साथ वर्षाजल सहेजने और भूजल रिचार्ज से जुड़े कार्य होंगे।

विभाग के अनुसार अल्मोड़ा, चंपावत समेत कुछ जिलों में चयनित नदियों की कार्ययोजना पर कार्य भी शुरू हो गया है, जबकि शेष में जल्द प्रारंभ करने की तैयारी है।

सहायक धाराओं को भी नवजीवन।
इस कार्यक्रम में चयनित नदियों की सहायक नदियों और छोटी जलधाराओं को विशेष महत्व दिया गया है। जलसमेट क्षेत्रों में पानी रोककर इसे जमीन में उतारने से सूखते स्रोतों को पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी। यह पहल गर्मियों में नदियों के घटते प्रवाह को थामने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल और सिंचाई की उपलब्धता बढ़ाने में भी मददगार होगी।

  • ये नदियां की गई हैं चयनित-
    बागेश्वर, गरुड़ गंगा
    चमोली, चंद्रभागा
    चंपावत, गौड़ी
    देहरादून, गडूल (सौंग)
    हरिद्वार, पथरी
    नैनीताल, शिप्रा-गौला
    पौड़ी, नयार पूर्वी
    पिथौरागढ़, घुरगतिया-तितरगाड (पूर्वी रामगंगा)
    रुद्रप्रयाग, पनार
    टिहरी, सौंग
    ऊधम सिंह नगर, फीका
    उत्तरकाशी, कमल

एक जिला-एक नदी’ कार्यक्रम के जरिए नदियों को पुनर्जीवन देकर दीर्घकालिक जल सुरक्षा की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। वर्तमान में बागेश्वर व ऊधम सिंह नगर जिले में चयनित नदियों की डीपीआर तैयार की जा रही है। शेष जिलों की चयनित नदियों के लिए धनराशि जारी कर दी गई है।