उत्तराखंड के कार्बेट व राजाजी में ड्रोन की निगरानी में होगी जंगल सफारी, मोबाइल फोन रहेगा बैन……….
देहरादून: कार्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व में 15 नवंबर से शुरू होने वाले पर्यटन सत्र में इस बार जंगल सफारी हाईटेक निगरानी के बीच होगी। सफारी पर ड्रोन से भी नजर रखी जाएगी। सभी जिप्सी वाहन जीपीएस से लैस होंगे तो ट्रेक पर मुख्य गेट के साथ ही जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जाएंगे।
सफारी में पर्यटकों के मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध के नियम का कड़ाई से अनुपालन कराया जाएगा। पर्यटन सत्र के दृष्टिगत दोनों रिजर्व में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इस कड़ी में कार्बेट में जिप्सियों का पंजीकरण शुरू कर दिया गया है, जबकि राजाजी में यह प्रक्रिया इस माह के अंत में होगी। वर्षाकाल में क्षतिग्रस्त ट्रेक रूट की मरम्मत का काम अक्टूबर में कराया जाएगा।
जंगल सफारी के दौरान कई बार सैलानी किसी वन्यजीव के नजर आने पर वाहन रुकवाकर मोबाइल से फोटोग्राफी करने लगते हैं। जंगल में यह व्यवहार पर्यटकों के साथ ही वन्यजीवों के लिए भी जोखिमपूर्ण होता है। इस सबको देखते हुए दोनों टाइगर रिजर्व के पर्यटक जोन में इस बार नई व्यवस्था के तहत जंगल सफारी के लिए तय नियमों के अनुपालन के साथ ही पर्यटकों व वन्यजीवों की सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। ताकि, व्यवस्था फुलप्रूफ हो सके।
प्रत्येक जिप्सी की लोकेशन निगरानी में
जगल सफारी के लिए कार्बेट में 385 और राजाजी में 237 जिप्सियों का संचालन होता है। इन पर अनिवार्य रूप से जीपीएस लगेगा, जिससे पता चल सकेगा कि जिप्सी किस मार्ग पर चल रही है। वह निर्धारित ट्रेक पर है या नहीं, इसकी निगरानी हो सकेगी।
नियमों की जानकारी से लैस होंगे चालक व नेचर गाइड
सफारी में चालक और नेचर गाइड ही मार्गदर्शक होते हैं। ऐसे में उनका पर्यटकों से व्यवहार, वन्यजीवों के नजदीक सफारी के दौरान सावधानी, पर्यटन जोन के नियम व वन्यजीव संरक्षण से जुड़े प्रविधानों की जानकारी से लैस होना आवश्यक है।
कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डा.साकेत बडोला और राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक कोको रोसे के अनुसार इस सबके दृष्टिगत चालकों, नेचर गाइड के प्रशिक्षण इस माह के आखिर या अक्टूबर के प्रथम पखवाड़े में होंगे। उन्होंने कहा कि जंगल सफारी को सुव्यवस्थित बनाने के दृष्टिगत इस बार कई कदम उठाए जा रहे हैँ।


