दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के एलिवेटेड कॉरिडोर से आसान हुई वन्यजीवों की राह, 18 प्रजातियों की बढ़ी आवाजाही………

सहारनपुर: दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का वन्यजीव कॉरिडोर का 12 किलोमीटर का हिस्सा राहत लेकर आया है। कॉरिडोर में बने अंडरपास से वन्यजीव आराम से आवाजाही कर रहे हैं। इससे वाहनों और जंगली जानवरों के बीच टकराव की आशंका नगण्य हुई हैं।

प्राकृतिक राह आसान और सुरक्षित हुई तो इसका सीधा असर वन्य जीवों की संख्या पर भी पड़ता दिख रहा है। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के संचालन के बाद सहारनपुर के गणेशपुर से देहरादून के आशारोड़ी के बीच विकसित एशिया का सबसे लंबे एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर से शिवालिक वन क्षेत्र में वन्यजीवों की गतिविधियां बढ़ी हैं।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) और लैंडस्केप्स रिकनेक्टेड के अध्ययन में कॉरिडोर के अंडरपास से 18 अलग-अलग वन्यजीव प्रजातियों की आवाजाही दर्ज की गई है।

लगभग 12 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर में आठ सामान्य एनिमल अंडरपास और दो विशेष हाथी अंडरपास सहित करीब 10 प्रमुख वन्यजीव मार्ग विकसित किए गए हैं। इसकी औसत ऊंचाई छह से सात मीटर रखी गई है, जिससे हाथी आसानी से नीचे से गुजर सकें।

1.11 लाख तस्वीरों ने खोला वन्यजीवन का राज
लगभग 40 दिनों तक चले कैमरा ट्रैप अध्ययन के दौरान गणेशपुर से आशारोड़ी के बीच करीब 18 किलोमीटर लंबे हिस्से में गतिविधि कैद हुई है। इस दौरान कैमराें ने 1,11,234 तस्वीरें ली। इनमें 40,444 तस्वीरों में वन्यजीव अंडरपास और कॉरिडोर का उपयोग करते दिखे।

कैमरा ट्रैप में हाथी, बाघ, तेंदुआ, सांभर, चीतल, नीलगाय, जंगली सूअर और गोल्डन जैकाल समेत कुल 18 प्रमुख प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज हुई। महत्वपूर्ण यह है कि हाथियों ने करीब 60 बार अंडरपास और कॉरिडोर का इस्तेमाल किया।

मादा तेंदुओं और शावकों की मौजूदगी बनी उम्मीद की वजह
राजाजी टाइगर रिजर्व की ओर से मोहंड क्षेत्र में मादा तेंदुओं और उनके शावकों की चहलकदमी वन क्षेत्र के अनुकूल वातावरण और वन्यजीवों के लिए बेहतर होती परिस्थितियों का महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वर्ष 2021 के अध्ययन में शिवालिक क्षेत्र में करीब 50 तेंदुएं थे। वर्ष 2026 में यह संख्या बढ़कर 80 से 90 तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। हाथियों की संख्या भी 50 से 60 के बीच पहुंचने का अनुमान है।

शोर से बचाने को लगाई गई थी साउंडप्रूफ शीट
कॉरिडोर से गुजरने वाले वाहनों के शोर व राेशनी का वन्यजीवों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े, इसके लिए साउंडप्रूफ शीट भी लगाई गई थी। इसका मकसद वाहनों की आवाज को वन क्षेत्र तक कम से कम पहुंचाना था, ताकि वन्यजीवों की सामान्य गतिविधियां प्रभावित न हों। चिंता की बात यह है कि लगने के कुछ ही महीनों बाद कई स्थानों पर साउंडप्रूफ शीट क्षतिग्रस्त हो गई हैं।

यह पाए जाते हैं वन्यजीव
मोहड़ वन रेंज में गुलदार, चीतल, सांभर, काकड, मोर, लोमड़ी, चौसिंहा, शुकर, हिरण, पाड़ा, गोह, बंदर, हाथी, तेंदुआ आदि वन्य जीव पाए जाते हैं।

कॉरिडार नहीं होने पर वन्य जीवों को रास्ते को पार करने में कठिनाई होती थी। वन्य जीवों को जान का खतरा रहता था। हार्न व राेशनी के कारण भी परेशानी होती थी। अब वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर ने राहत को आसान कर दिया है। मोहंड रेंज में जानवरों की संख्या बढ़ता बेहद ही सुखद है। -डॉ. संदीप कुमार वनस्पति विज्ञान विभाग एमएसयू।

जब यह कॉरिडोर नहीं था तो हादसों का खतरा रहता था। पहले शिवालिक में विचरण करने वाले जीव-जंतु सड़क पार नहीं कर पाते थे। अब कॉरिडोर से जहां वन्य जीवों का आवागमन सुगम हुआ है तो राहगीरों को भी वन्य जीव दिख रहे हैं। डरने वाले जीव-जंतुओं ने आना छोड़ दिया था। -डॉ. उमर सैफ वन्यजीव विशेषज्ञ।

राजाजी टाइगर रिजर्व की ओर से मोहंड क्षेत्र में वन्यजीवों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। पुराने आवागमन साधनों में बदलाव और एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर के संचालन के पश्चात मोहंड का जंगल वन्यजीवों के लिए पहले की तुलना में अधिक अनुकूल हुआ है। इसी का परिणाम है कि तेंदुओं व हाथी जैसे जानवरों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। -लव सिंह, क्षेत्रीय वनाधिकारी मोहंड रेंज सहारनपुर।