ये फूल नहीं, डायमंड है यह! उत्तराखंड के पहाड़ों में दिखा दुर्लभ ‘पदमचाल’ जो खिलता है 15 सालों में एक बार………
देहरादून: क्या आप कल्पना कर सकते हैं एक ऐसे फूल की जो इंसानों से भी ज्यादा लंबा हो? अगर नहीं तो हाल ही में खोजा गया यह नया फूल आपको चौंका सकता है। हिमालय के पहाड़ों में पाया जाने वाला यह फूल केवल दिखने में ही अलग नहीं है, इसके खिलने का समय भी बड़ा ही अनोखा कहा जा रहा है। जिसके चलते यह फूल सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है, आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं कि आखिर वो कौन सी विशेषताएं हैं जो इसे खास बनाती हैं।
हिमालय का डायमंड फूल
प्रकृति में कितने दुर्लभ चमत्कार छिपे हैं, इसका सबसे बड़ा उदाहरण हिमालय के पहाड़ों में पाया गया डायमंड फूल है। वैसे तो इसे डायमंड फूल कहा जा रहा है, जिसके पीछे एक बहुत बड़ा कारण है। दरअसल, यह अल्पाइन फूल प्रतिकूल परिस्थितियों जैसे- अल्ट्रा वायलेट रेडिएशन, ठंडे तापमान और 40 प्रतिशत से भी कम ऑक्सीजन वाली तेज बर्फीली हवाओं में भी उग सकता है। यही वजह है कि इसे फूलों में हीरा कहा गया है।
वहीं, बात करें इसके असली नाम की तो इसे केन्जो कहा जाता है और स्थानीय भाषा में लोग पदमचाल भी कहते हैं। यह हिमालय के ठंडे बर्फीले पहाड़ों पर समुद्र तल से करीब 4000 मीटर की ऊंचाई पर पाया गया है।
इंसान से भी बड़ा फूल एक बार ही खिलता है
इस दुर्लभ फूल के बारे में कहा जाता है कि कुछ परिस्थितियों में यह इंसान से भी लंबा हो सकता है। इसकी ऊंचाई 3.2 फीट से 6.5 फीट तक होने का अनुमान है। वहीं, इसका एक फूल खिलने में करीब 7-15 साल तक लग सकते हैं। फिर जैसे ही फूल खिल जाता है तो धीरे-धीरे इसका जीवन चक्र खत्म हो सकता है।
औषधीय गुणों के लिए लोकप्रिय
हिमालय के पहाड़ों में रहने वाले लोग सदियों से इस फूल को एक औषधि की तरह मानते रहे हैं, क्योंकि यह कई शारीरिक समस्याओं को दूर करने में मददगार है,
जैसे: –
सिर दर्द
फ्रैक्चर
अपच
शरीर की सूजन
कहां देखा जा सकता है ?
अगर आप ट्रेकिंग करते हैं और खासतौर से डायमंड फूल को देखने की सोच रहे हैं तो इसे उत्तराखंड के पहाड़ों में देखा जा सकता है। इनमें फ्लावर ऑफ वैली नेशनल पार्क, हेमकुंड साहिब क्षेत्र, गंगोत्री नेशनल पार्क शामिल हैं। इसके अलावा, यह दुर्लभ फूल उत्तरी सिक्किम और भूटान के हिमालय में भी देखा जा सकता है।


