उत्तराखंड की राजधानी में 16 करोड़ की लागत से बना नंदा की चौकी का पुल पहली ही बड़ी बारिश में धंसा, पुल की गुणवत्ता पर सवाल……..

देहरादून: देहरादून-पांवटा साहिब के पुराने राजमार्ग पर नंदा की चौकी स्थित टौंस नदी पर करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया पुनर्निर्मित मुख्य पुल पहली ही बड़ी बारिश में धंस गया है। पुल को यातायात के लिए शुरू हुए अभी कुछ ही दिन हुए थे और इतने कम समय में सामने आई यह गंभीर क्षति लोक निर्माण विभाग (PWD) की निर्माण गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े कर रही है।

स्थानीय लोगों के अनुसार पुल में अचानक भारी धंसाव होने से आवागमन प्रभावित हुआ है। प्रशासन और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण शुरू कर दिया है और धंसाव के कारणों की जांच की जा रही है।

11 जुलाई को धंसी थी अस्थाई पुलिया
गौरतलब है कि इससे पहले 11 जुलाई 2026 की रात टौंस नदी के तेज बहाव में ह्यूम पाइप डालकर बनाई गई अस्थाई पुलिया धंस गई थी। यह पुलिया पुराने राजमार्ग पर यातायात बनाए रखने के लिए बनाई गई थी। पुलिया धंसने के बाद लोक निर्माण विभाग ने तेजी से अंतिम कार्य पूरे किए और 12 जुलाई 2026 से पुनर्निर्मित मुख्य पुल पर वाहनों का संचालन शुरू करा दिया था।

अब उसी नए पुल में धंसाव होने से लोगों में चिंता और नाराजगी दोनों बढ़ गई हैं।

करीब 10 महीने तक चली थी अस्थाई व्यवस्था
जानकारी के अनुसार 15 सितंबर 2025 की मध्यरात्रि को नंदा की चौकी का पुराना मुख्य पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। पुल की एबटमेंट वॉल और एक स्लैब टूटने के बाद इस मार्ग पर यातायात बाधित हो गया था।

इसके बाद लोक निर्माण विभाग ने टौंस नदी में ह्यूम पाइप डालकर अस्थाई पुलिया तैयार की, जिसने करीब 10 महीने तक देहरादून-पांवटा पुराने राजमार्ग पर यातायात की जिम्मेदारी संभाली।

पुराने पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद विभाग ने लगभग 16 करोड़ रुपये की लागत से नए मुख्य पुल के पुनर्निर्माण का कार्य शुरू किया था। विभागीय अधिकारियों के अनुसार निर्माण कार्य तेजी से पूरा किया गया ताकि पुराने राजमार्ग पर यातायात जल्द बहाल हो सके।

लेकिन पुल के शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद भारी बारिश में इसमें धंसाव होना पूरे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।

पहली बड़ी बारिश में ही सामने आई बड़ी खामी।
क्षेत्र में हुई हालिया बारिश के दौरान पुल के एक हिस्से में भारी धंसाव और संरचनात्मक क्षति सामने आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की क्षति के पीछे फाउंडेशन, एप्रोच रोड, मिट्टी की मजबूती या जल निकासी व्यवस्था में कमी जैसे कारण हो सकते हैं।

फिलहाल प्रशासन ने एहतियात के तौर पर पुल की स्थिति का तकनीकी परीक्षण शुरू कर दिया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी।
घटना के बाद नंदा की चौकी और आसपास के ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पुल पहली ही बड़ी बारिश नहीं झेल पाया, जो बेहद चिंताजनक है।

स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि:
पुल निर्माण की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए,
निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए स्थायी एवं सुरक्षित निर्माण मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए।

PWD की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल।
उत्तराखंड में मानसून के दौरान सड़क और पुलों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में नंदा की चौकी का यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह पुल हाल ही में पुनर्निर्मित हुआ था और इस पर भारी सार्वजनिक धन खर्च किया गया था।

यदि जांच में निर्माण संबंधी खामियां सामने आती हैं तो यह मामला विभागीय लापरवाही और गुणवत्ता नियंत्रण की गंभीर विफलता माना जा सकता है।