उत्तराखंड में टिहरी के बाद ये होगा देश का दूसरा सबसे ऊंचा बांध, बढ़ेगा बिजली उत्पादन…….
देहरादून: करीब छह दशक से कागजों में उलझी किशाऊ जलविद्युत एवं सिंचाई परियोजना अब नए स्वरूप में आगे बढ़ेगी। उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश ने परियोजना के नए डिजाइन पर सहमति बना ली है। बदलाव के बाद बांध की ऊंचाई में कमी हुई है, लेकिन उसका दायरा बढ़ा है, 232.6 मीटर ऊंचा किशाऊ बांध उत्तराखंड के 260.5 मीटर ऊंचे टिहरी बांध के बाद देश का दूसरा सबसे ऊंचा बांध होगा।
नई डीपीआर के अनुसार परियोजना में जलाशय की जीवंत भंडारण क्षमता 1324 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) से बढ़ाकर 1561.91 एमसीएम की गई है। यानी जलाशय में अब 237.81 एमसीएम
अतिरिक्त पानी संग्रहित किया जा सकेगा। इससे यमुना बेसिन के राज्यों के लिए पेयजल, सिंचाई और नदी प्रवाह प्रबंधन की क्षमता पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी।
परियोजना के तकनीकी स्वरूप में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। बांध की ऊंचाई 236 मीटर से घटाकर 232.6 मीटर तय की गई है। वहीं, पावर प्लांट की स्थापित क्षमता 660 मेगावाट से घटाकर 422 मेगावाट कर दी गई है। स्थापित क्षमता में कमी के बावजूद वार्षिक बिजली उत्पादन बढ़ गया है।
संशोधित डीपीआर में औसत वार्षिक ऊर्जा उत्पादन 1379 मिलियन यूनिट (एमयू) से बढ़ाकर 1457 एमयू कर दिया गया है। यानी परियोजना में प्रति वर्ष 78 एमयू अतिरिक्त बिजली का उत्पादन होगा। यह बदलाव ऊर्जा उत्पादन की दक्षता बढ़ाने व जल उपलब्धता के बेहतर उपयोग को ध्यान में रखकर किया गया है।
केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) ने बदलावों को मंजूरी दे दी है। संशोधित लागत और जल एवं विद्युत घटकों की अंतिम स्वीकृति अभी केंद्र सरकार के स्तर पर लंबित है।
23,781 करोड़ लीटर अतिरिक्त पानी संग्रह
परियोजना की जीवंत भंडारण क्षमता बढ़ाई गई है। अब जलाशय में पहले की तुलना में करीब 23,781 करोड़ लीटर अतिरिक्त पानी संग्रहित किया जा सकेगा। इसका लाभ मानसून के दौरान अतिरिक्त पानी को संरक्षित कर गैर-मानसूनी महीनों में सिंचाई व पेयजल के लिए किया जा सकेगा। जलाशय में अधिक पानी होने से बिजली उत्पादन के लिए भी बेहतर जल प्रबंधन संभव होगा।
बांध के निर्माण संबंधी जोखिम कम होंगे
बांध की ऊंचाई घटाकर 232.6 मीटर की गई है। भूगर्भीय और भूकंपीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसा किया गया है। कम ऊंचाई से निर्माण संबंधी जोखिम कम होंगे। ऊंचाई कम करने के बावजूद परियोजना की भंडारण क्षमता बढ़ाई गई है, जो बताता है कि जलाशय के डिजाइन में सुधार कर परियोजना को सुरक्षा और उपयोगिता के लिहाज से प्रभावी बनाने की कोशिश की गई है।
वार्षिक बिजली उत्पादन बढ़ाया गया
परियोजना की स्थापित विद्युत क्षमता अब घटकर 422 मेगावाट हो गई है। स्थापित क्षमता में कमी कर परियोजना को कम पानी की उपलब्धता में भी अधिक बिजली उत्पादन करने के लिए डिजाइन किया गया है। इससे परिचालन लागत घट जाएगी और मशीनों की कार्यक्षमता बढ़ेगी। इसीलिए स्थापित क्षमता घटने के बावजूद परियोजना हर साल 78 मिलियन यूनिट (एमयू) अतिरिक्त बिजली उत्पादन करेगी।


