उत्तराखंड के दयारा बुग्याल में लापता महिला का 9 दिन बाद भी नहीं मिला सुराग। सर्च अभियान में लगाया हेलीकॉप्टर……..

उत्तरकाशी: उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल दयारा बुग्याल से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हुई रामनगर निवासी 24 वर्षीय बबीता पांडे का एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है। महिला की तलाश के लिए जिला प्रशासन ने खोज एवं बचाव अभियान और तेज कर दिया है। अब सर्च ऑपरेशन में हेलीकॉप्टर की भी मदद ली जा रही है।

जिला प्रशासन के अनुसार दयारा बुग्याल और आसपास के दुर्गम क्षेत्रों में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, राजस्व विभाग, पुलिस और अन्य एजेंसियों की संयुक्त टीमें लगातार सघन तलाशी अभियान चला रही हैं। रविवार को खोज अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए हेलीकॉप्टर के माध्यम से हवाई सर्वेक्षण किया गया। हेलीकॉप्टर से दयारा बुग्याल, जंगलों, खाइयों और संभावित मार्गों की निगरानी कर महिला की तलाश की गई।

जानकारी के अनुसार नैनीताल जिले के रामनगर की रहने वाली बबीता पांडे अपने दो साथियों के साथ उत्तरकाशी घूमने आई थीं। उन्होंने हर्षिल और गंगोत्री धाम के दर्शन के बाद दयारा बुग्याल ट्रेक का रुख किया। ट्रेकिंग के दौरान तीनों गोई कैंप में रुके थे।

बताया जा रहा है कि 29 मई की रात करीब 11 बजे बबीता पांडे टेंट से बाहर निकली थीं। उस समय वह मोबाइल फोन पर गाने सुन रही थीं। इसके बाद वह रहस्यमय तरीके से लापता हो गईं। अगली सुबह साथियों ने जब उन्हें कैंप में नहीं पाया तो आसपास तलाश शुरू की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। बाद में पुलिस और प्रशासन को सूचना दी गई।

जंगल, खाइयां और चट्टानों में जारी सर्च ऑपरेशन
दयारा बुग्याल क्षेत्र करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है और यहां घने जंगल, गहरी खाइयां, ऊंची चट्टानें तथा बेहद दुर्गम पहाड़ी रास्ते हैं। ऐसे कठिन भौगोलिक हालात के बावजूद रेस्क्यू टीमें लगातार महिला की तलाश में जुटी हुई हैं। संभावित ठिकानों, ट्रेकिंग रूट और आसपास के सभी क्षेत्रों में व्यापक खोज अभियान चलाया जा रहा है।

जिला प्रशासन का कहना है कि महिला के संबंध में कोई भी सुराग मिलने तक खोज अभियान जारी रहेगा। सभी संभावित पहलुओं पर जांच की जा रही है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से भी अपील की है कि यदि बबीता पांडे से जुड़ी कोई जानकारी मिले तो तत्काल पुलिस या प्रशासन को सूचित करें।

लगातार नौ दिनों से चल रहे सर्च ऑपरेशन के बावजूद कोई ठोस सुराग न मिलने से परिवार की चिंता बढ़ती जा रही है। वहीं पूरे उत्तरकाशी और पर्यटन जगत की निगाहें इस हाई-प्रोफाइल रेस्क्यू अभियान पर टिकी हुई हैं।