उत्तराखंड की राजधानी के आईटी पार्क भूमि अधिग्रहण मामला, हाईकोर्ट ने पलटा देहरादून कोर्ट का फैसला; सिडकुल की अपील मंजूर……
नैनीताल: हाई कोर्ट ने सहस्त्रधारा रोड, देहरादून पर स्थापित किए गए आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक पार्क के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजे से जुड़े एक पुराने विवाद में महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए सिडकुल की अपील मंजूर कर ली है। न्यायालय ने मुआवजे में की गई भारी वृद्धि को अनुचित ठहराते हुए मूल पुरस्कार को बहाल कर दिया।
विवाद ग्राम गुजराड़ा मान सिंह की भूमि के अधिग्रहण से जुड़ा था। भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई पूरी होने के बाद विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलएओ) ने वर्ष 2005 में पुरस्कार घोषित करते हुए भूमि स्वामी को वैधानिक लाभों सहित लगभग 34.72 लाख का मुआवजा प्रदान किया था।
हालांकि भूमि स्वामी अवधेश चौधरी ने इस मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए संदर्भ न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। तृतीय अपर जिला न्यायाधीश, देहरादून ने 13 दिसम्बर 2010 को पारित आदेश में क्षेत्र की सर्किल दरों को आधार बनाते हुए मुआवजा बढ़ाकर 1000 प्रति वर्ग मीटर कर दिया था।
विशेष अपील दायर कर दी चुनौती
इस आदेश को सिडकुल ने विशेष अपील दायर कर चुनौती दी। जिसमें कहा गया कि भूमि अधिग्रहण मामलों में बाजार मूल्य का निर्धारण सर्किल दरों के आधार पर नहीं किया जा सकता। सिडकुल ने यह भी तर्क रखा कि भूमि स्वामी ने स्वयं उक्त भूमि को अधिग्रहण अधिसूचना जारी होने से लगभग 15 माह पूर्व खरीदा था और उसी भूमि का य-विक्रय मूल्य बाजार दर का सबसे प्रामाणिक संकेतक था।
न्यायालय ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि संदर्भ न्यायालय ने भूमि को आवासीय मानकर सर्किल दर लागू की थी, जबकि उपलब्ध अभिलेखों में भूमि कृषि प्रकृति की थी। न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि भूमि का बाजार मूल्य निर्धारित करने के लिए वास्तविक बिक्री विलेखों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
इन निष्कर्षों के आधार पर न्यायालय ने संदर्भ न्यायालय की ओर से मुआवजे में की गई वृद्धि को निरस्त कर दिया और विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी की ओर से निर्धारित मूल मुआवजे को पुनः लागू कर दिया। इस निर्णय को भूमि अधिग्रहण मामलों में मुआवजा निर्धारण के सिद्धांतों को स्पष्ट करने वाला महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की एकलपीठ में हुई।


