खस्ता करारी मसाला बाटी बनाना है बहुत आसान, वृत्ता साहनी ने बताई रेसिपी,ओवन की नहीं जरूरत, भूल जाओगे समोसे-कचौड़ी……..
देहरादून: राजस्थानी खान-पान की शान बाटी को अक्सर सादा बनाया जाता है, लेकिन अगर इसमें चटपटी स्टफिंग भर दी जाए, तो एक शाही नाश्ता बन जाती है। वृत्ता साहनी ने मसाला बाटी की एक ऐसी खास रेसिपी शेयर की है जो बाहर से एकदम कुरकुरी और अंदर से मसालों से भरपूर है।
अक्सर जब कुछ चटपटा और खस्ता खाने की सोचते हैं, तो सबसे पहले समोसे या कचौड़ी का ख्याल आता है। लेकिन कुकिंग एक्सपर्ट वृत्ता साहनी ने एक ऐसी लाजवाब रेसिपी साझा की है, जिसके आगे आप इन दोनों का स्वाद भूल जाएंगे। यह खस्ता करारी मसाला बाटी है, जो बाहर से बिस्किट जैसी कुरकुरी और अंदर से चटपटे आलू-मटर के मसालों से भरपूर होती है।
बाटी के लिए परफेक्ट मोयन वाला आटा।
इस रेसिपी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे बनाने के लिए आपको किसी ओवन या तंदूर की जरूरत नहीं है; इसे घर के साधारण मोटे तले वाले बर्तन में धीमी आंच पर घी के साथ सेंककर तैयार किया जा सकता है। अजवाइन की खुशबू वाला आटा और दरदरे कुटे हुए मसालों का कॉम्बिनेशन इसे एक शाही स्वाद देता है।

बाटी के लिए परफेक्ट मोयन वाला आटा
एक अच्छी बाटी की पहली पहचान उसका खस्तापन है। इसके लिए 2 कप गेहूं के आटे में 1/4 कप सूजी मिलाएं। सूजी बाटी को दानेदार और कुरकुरा बनाती है। इसमें नमक, बेकिंग सोडा, अजवाइन और सबसे जरूरी 4 चम्मच घी डालें। आटे को हाथों से रगड़कर देखें, अगर मुट्ठी बंधने लगे तो समझिये मोयन सही है। अब थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर एक सख्त आटा गूंथ लें और इसे 15-20 मिनट के लिए ढककर छोड़ दें।
दरदरा सीक्रेट मसाला तैयार करना
बाटी के असली स्वाद का राज वृत्ता साहनी के इस खास कूटकर तैयार किए गए मसाले में है। इमामदस्ते या चॉपर में साबुत धनिया, सौंफ, जीरा, हरी मिर्च, अदरक और लहसुन की कलियां डालें। इन्हें बारीक पीसने के बजाय दरदरा कूट लें। जब ये दरदरे मसाले तेल में भूनते हैं, तो बाटी के अंदर एक बेहतरीन खुशबू और क्रंच पैदा करते हैं जो पिसे हुए मसालों से नहीं आता।

चटपटी और जायकेदार स्टफिंग
अब एक पैन में सरसों का तेल गर्म करें। इसमें जीरा, हींग और तैयार किया हुआ दरदरा मसाला डालकर भूनें। इसके बाद बारीक कटा प्याज और उबले हुए मटर डालें। अब इसमें लाल कश्मीरी मिर्च, हल्दी, नमक, गरम मसाला और अमचूर पाउडर मिलाएं। अमचूर बाटी को वह जरूरी खटास देता है जो समोसे जैसा अहसास कराती है। आखिरी में उबले हुए मैश किए हुए आलू और हरा धनिया डालकर अच्छी तरह मिलाएं।
बाटी को भरने का सही तरीका
जब स्टफिंग ठंडी हो जाए, तो आटे की छोटी-छोटी लोइयां तोड़ें। इन्हें बेलने के बजाय हाथों से फैलाकर एक कटोरी जैसा आकार दें। बीच में तैयार आलू-मटर का मसाला रखें और चारों तरफ से किनारों को उठाते हुए बीच में लाकर सील कर दें। ध्यान रहे कि कहीं से भी दरार न रहे, बाटी को हल्का चपटा या गोल आकार दें।

मोटे तले के बर्तन में सिकाई का जादू
वृत्ता साहनी के अनुसार, बाटी को तलने के बजाय घी में धीरे-धीरे सेंकना चाहिए। एक मोटे तले की कड़ाही या टोपिया लें और उसमें पर्याप्त घी डालें। आंच को बिल्कुल धीमा रखें। बाटी को बर्तन में रखें और उलट-पलट करते हुए सुनहरा भूरा होने तक पकाएं। धीमी आंच पर पकने से बाटी अंदर तक सिकती है और बाहर से कचौड़ी की तरह करारी हो जाती है।

लहसुन की चटनी के साथ शाही सर्विंग
जब बाटी पूरी तरह से सुनहरी और खस्ता दिखने लगे, तो इन्हें घी से निकाल लें। मसाला बाटी का असली आनंद तीखी लहसुन की चटनी और गुड़ के साथ आता है। आप इसे दाल के साथ भी परोस सकते हैं या बस चाय के साथ एक स्नैक की तरह खा सकते हैं। यह डिश पार्टी के लिए भी एक बेहतरीन विकल्प है क्योंकि यह लंबे समय तक कुरकुरी बनी रहती है।
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