उत्तराखंड के विधानसभा में गरमा गई बहस! 330 खाद्य सैंपल फेल, भूकंप सेंसर पर भी घिरी सरकार…….
गैरसैंण: गैरसैंण के भराड़ीसैंण में चल रहे उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र का आज चौथा दिन है। दिन की कार्यवाही की शुरुआत प्रश्नकाल से होगी, जिसमें विधायक अपने-अपने क्षेत्रों और जनहित से जुड़े विषयों पर सरकार से जवाब मांगेंगे। इसके बाद सदन में राज्य के बजट पर सामान्य चर्चा कराई जाएगी। विभागवार बजट पर विस्तार से चर्चा कल से शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। बजट चर्चा के बाद नियम 58 के तहत सूचीबद्ध सवालों पर भी विचार-विमर्श होगा, जिससे आज का दिन भी सदन के लिए काफी अहम माना जा रहा है।
बजट पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक अपनी-अपनी राय रखेंगे। विपक्ष जहां बजट में की गई घोषणाओं और प्रावधानों पर सवाल उठाएगा, वहीं सरकार की ओर से इसे राज्य के विकास के लिए संतुलित और दूरदर्शी बजट बताया जाएगा। चर्चा के दौरान प्रदेश में विकास योजनाओं, रोजगार के अवसरों, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, सड़क, पर्यटन और कृषि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तार से बात होने की संभावना है। कई विधायक अपने विधानसभा क्षेत्रों से जुड़ी समस्याओं और मांगों को भी सदन में उठाकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश करेंगे।
इससे पहले बुधवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने सत्र की अवधि बढ़ाने के संकेत दिए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो रविवार को अवकाश रखकर सोमवार को भी महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले हर सवाल का जवाब सरकार देने के लिए तैयार है और विपक्ष जितनी चर्चा चाहता है, उतनी चर्चा कराई जाएगी।
सदन में खाद्य पदार्थों में मिलावट और भ्रामक दावों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। विधायक बृजभूषण गैरोला ने खाद्य सुरक्षा विभाग में खाली पदों और देहरादून में खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला की स्थिति को लेकर सवाल किया। इसके जवाब में स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि हर वर्ष खाद्य पदार्थों के सैंपल की जांच की जाती है। पिछले दो वर्षों में कुल 3,311 सैंपल लिए गए, जिनमें से 330 सैंपल जांच में असफल पाए गए। इन मामलों से जुड़े सभी प्रकरण वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन हैं। उन्होंने यह भी बताया कि देहरादून में टेस्टिंग लैब का निर्माण पूरा हो चुका है और 31 मार्च 2026 से पहले इसका उद्घाटन कर दिया जाएगा।
ऑनलाइन खाद्य पदार्थों की बिक्री को लेकर भी सदन में चर्चा हुई। विधायक प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि आमतौर पर त्योहारों से पहले ही जांच अभियान चलाए जाते हैं और कार्रवाई मुख्य रूप से छोटे व्यापारियों पर होती है, जबकि बड़े मॉल और सुपरमार्केट में पर्याप्त जांच नहीं होती। उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से बिक रहे खाद्य उत्पादों की निगरानी को लेकर भी सवाल उठाया। इस पर स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि जहां भी सदस्य सुझाव देंगे, वहां कार्रवाई की जाएगी और जांच अभियान जल्द शुरू किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि कैंसर को नोटिफाई करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे और नीति स्तर पर इस बीमारी से निपटने के लिए बड़े कदम उठाए जाएंगे।
विधायक विनोद चमोली ने भी खाद्य परीक्षण व्यवस्था को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पहले स्थानीय निकायों के माध्यम से खाद्य परीक्षण और मिलावट के खिलाफ कार्रवाई होती थी, लेकिन बाद में यह जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग को सौंप दी गई। उनके अनुसार स्थानीय निकायों के पास इस कार्य के लिए आवश्यक तंत्र मौजूद है और उन्हें दोबारा यह जिम्मेदारी दी जा सकती है। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार इस सुझाव पर विचार करेगी।
कांग्रेस विधायक मयूख महर ने पिथौरागढ़ के बेस अस्पताल में हो रहे भू-धंसाव के मुद्दे को सदन में उठाया। उन्होंने पूछा कि अस्पताल के निर्माण से पहले क्या भू-वैज्ञानिक सर्वे कराया गया था और यदि किया गया था तो उसके बावजूद क्षेत्र में भू-धंसाव की स्थिति क्यों सामने आई। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि पिथौरागढ़ में बन रहे मेडिकल कॉलेज के निर्माण से पहले भू-वैज्ञानिकों द्वारा सर्वे कराया गया था और उसी के आधार पर निर्माण कार्य शुरू किया गया। हालांकि बाद में भू-धंसाव और भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं, इसलिए अब इस पूरे मामले की जांच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की से कराई जाएगी। मयूख महर ने दावा किया कि मेडिकल कॉलेज के आसपास का पूरा क्षेत्र भू-धंसाव से प्रभावित है, जिस पर सरकार ने निरीक्षण कराने की बात कही है।
सत्र के प्रश्नकाल में भूकंप से जुड़ा मुद्दा भी उठा। विधायक काज़ी निजामुदीन ने राज्य में लगाए गए भूकंप सेंसर और उनकी बिजली आपूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्था के बारे में जानकारी मांगी। इसके जवाब में संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि राज्य में फिलहाल 169 स्थानों पर भूकंप सेंसर लगाए गए हैं और भविष्य में 500 अतिरिक्त सेंसर लगाने की योजना है। विपक्ष ने इन सेंसरों पर हुए खर्च के बारे में भी सवाल किया, जिस पर सरकार ने बताया कि 169 सेंसर लगाने में लगभग 115 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।


