उत्तराखंड में क्या 15 मार्च को अंधेरे में डूब जाएगा नैनीताल, जानिए ऊर्जा निगम और पालिका के बीच क्यों मचा है घमासान………

नैनीताल: सरोवर नगरी नैनीताल पर एक बार फिर अंधेरे का खतरा मंडरा रहा है। ऊर्जा निगम और नगर पालिका के बीच 4 करोड़ रुपये के बिजली बिल को लेकर ठन गई है। निगम ने 15 मार्च तक का अल्टीमेटम देते हुए स्ट्रीट लाइट काटने की चेतावनी दी है, तो दूसरी तरफ नगर पालिका ने भी निगम पर करोड़ों रुपये का किराया बकाया होने का बड़ा आरोप जड़ दिया है। आखिर क्या है ‘1885 टेलीग्राफी एक्ट’ का वो पेच जिसे लेकर दोनों विभाग आमने-सामने हैं। क्या पिछले साल की तरह इस बार भी नैनीताल की सड़कों पर छाया रहेगा अंधेरा? आइए जानते हैं।

नैनीताल: उत्तराखंड की सरोवर नगरी नैनीताल में बिजली बिल को लेकर नगर पालिका और उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (ऊर्जा निगम) के बीच एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। ऊर्जा निगम ने चेतावनी दी है कि यदि नगर पालिका ने बकाया बिजली बिल का भुगतान नहीं किया, तो 15 मार्च को शहर की स्ट्रीट लाइटों के कनेक्शन काट दिए जाएंगे. ऊर्जा निगम के अनुसार नगर पालिका पर करीब 4 करोड़ 1 लाख 13 हजार 18 रुपये का बिजली बिल बकाया है। इस संबंध में निगम की ओर से पालिका को नोटिस भी भेजा गया है।

हालांकि नगर पालिका का कहना है कि उन्हें ऊर्जा निगम का पत्र प्राप्त हुआ है. नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा का कहना है कि ऊर्जा निगम पर भी पालिका के करीब 1 करोड़ 30 लाख रुपये बकाया हैं। उनका कहना है कि पहले दोनों पक्षों के अभिलेखों का मिलान किया जाना चाहिए, जिसके लिए निगम से कर्मचारी भेजने का अनुरोध किया गया है। वहीं ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता एस के सहगल का कहना है कि यदि समय पर भुगतान नहीं किया गया, तो तय तिथि पर स्ट्रीट लाइटों के कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि ऐसा विवाद पहले भी सामने आ चुका है। पिछले साल मार्च में भी बकाया बिल के चलते शहर की स्ट्रीट लाइटें दो रातों तक बंद रहीं, जिससे कई सड़कें और गलियां अंधेरे में डूब गई थीं। उस समय नगर पालिका ने करीब 10 लाख रुपये जमा कर मामला सुलझाया था।

पालिका बोली..पहले ही हो चुका भुगतान
बिजली बिल के भुगतान को लेकर नगर पालिका और ऊर्जा निगम के बीच एक बार फिर विवाद की स्थिति बन गई है। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा ने बताया कि ऊर्जा विभाग की ओर से पालिका को एक पत्र प्राप्त हुआ है, जिसका जवाब तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014–15 में राज्य सरकार के वित्त विभाग द्वारा नगर पालिका की ओर से ऊर्जा निगम को देय राशि काटकर पहले ही भुगतान कर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद भी ऊर्जा निगम ने उस राशि का समायोजन नहीं किया है और पालिका से पूरा भुगतान करने की मांग की जा रही है, जो पूरी तरह से गलत है।

रोहिताश शर्मा ने कहा कि सरकार के जीओ के पैरा 6 और 7 में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि किसी भी प्रकार का अतिरिक्त अधिभार नहीं लगाया जा सकता। इसके बावजूद ऊर्जा निगम द्वारा नियमों की अनदेखी करते हुए बिल में अधिभार जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि शहर की स्ट्रीट लाइटों पर किसी प्रकार के मीटर नहीं लगे होते हैं।

पहले शहर में सोडियम लाइटें लगी थीं, जिनका बिजली बिल काफी कम आता था, लेकिन अब ऊर्जा निगम द्वारा ज्यादा बिल की मांग की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार के वित्त विभाग द्वारा करीब 1 करोड़ 31 लाख रुपये का भुगतान ऊर्जा निगम को पहले ही किया जा चुका है। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि ऊर्जा निगम स्वयं नगर पालिका का करीब 4 करोड़ रुपये से अधिक का किराया बकाया रखे हुए है. उनका कहना है कि बिजली विभाग के कई ट्रांसफार्मर नगर पालिका की जमीन पर लगे हुए हैं. इसके अलावा विभाग के स्टेशन, भवन, गेस्ट हाउस और यहां तक कि मुख्य कार्यालय भी नगर पालिका की इमारतों में संचालित हो रहे हैं, जिनका न तो किराया दिया जाता है और न ही कोई टैक्स जमा किया जाता है. उन्होंने कहा कि ऊर्जा निगम के पास शहर की स्ट्रीट लाइट काटने का अधिकार जरूर है, लेकिन यदि ऐसा किया जाता है तो इससे आम जनता को अनावश्यक परेशानी होगी।

भुगतान नहीं हुआ तो काट दी जाएंगी स्ट्रीट लाइटें
वहीं इस पूरे मामले पर ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता एस.के. सहगल ने बताया कि नगर पालिका पर ऊर्जा निगम का करीब 4 करोड़ 11 लाख 30 हजार रुपये का बिजली बिल बकाया है. उन्होंने कहा कि ऊर्जा विभाग के सभी सब-स्टेशन 1885 के टेलीग्राफी एक्ट के प्रावधानों के तहत स्थापित किए गए हैं. इस अधिनियम के अनुसार टेलीग्राफी लाइनों और उससे जुड़े ढांचे के लिए अलग से अनुमति लेना आवश्यक नहीं होता। इसी आधार पर सरकार द्वारा विभाग को उक्त भूमि पर सब-स्टेशन और कार्यालय संचालित करने की अनुमति दी गई है. उन्होंने यह भी कहा कि यही प्रावधान इंडियन इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 में भी लागू होता है. एस.के. सहगल ने स्पष्ट किया कि नगर पालिका को बिजली बिल का पूरा भुगतान करना होगा।

यदि भुगतान नहीं किया गया तो 15 मार्च को शहर की स्ट्रीट लाइटों की बिजली आपूर्ति काट दी जाएगी। उन्होंने बताया कि बिल जमा करने के लिए विभाग की ओर से नगर पालिका को 25 फरवरी से 15 दिनों का समय दिया गया था। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है तो नियमानुसार बिल पर अधिभार लगाया जाता है, और इसी नियम के तहत बकाया राशि पर अधिभार भी जोड़ा गया है।