उत्तराखंड में शिक्षक भर्ती घोटाले का खुलासा: बाहरी राज्यों की डिग्री, स्थानीय निवास का खेल, 55 सहायक अध्यापक जांच के घेरे में……..
देहरादून: उत्तराखंड में फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे सरकारी नौकरी पाने के मामलों के बीच अब शिक्षक भर्ती से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पिथौरागढ़ जिले में बाहरी राज्यों से डीएलएड डिप्लोमा लेकर सहायक अध्यापक बने 55 शिक्षक शिक्षा विभाग की जांच के दायरे में आ गए हैं। आरोप है कि इन अभ्यर्थियों ने डिग्री लेने के लिए खुद को दूसरे राज्यों का स्थायी निवासी दिखाया और नियुक्ति के समय उत्तराखंड का निवास प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया।
जानकारी के अनुसार पिथौरागढ़ जिले के छह विकासखंडों में तैनात इन 55 सहायक अध्यापकों में से अधिकांश कुमाऊं मंडल के मूल निवासी बताए जा रहे हैं। कई महिला शिक्षकों का मायका और ससुराल भी कुमाऊं क्षेत्र में ही है। इसके बावजूद डीएलएड प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने स्वयं को उत्तर प्रदेश, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों का स्थायी निवासी दर्शाया, ताकि वहां से डिप्लोमा प्राप्त किया जा सके।
डिग्री हासिल करने के बाद इन अभ्यर्थियों ने उत्तराखंड का स्थायी निवास प्रमाणपत्र बनवाकर सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति प्राप्त कर ली। इस प्रक्रिया के जरिए उन्होंने प्रदेश के स्थानीय और प्रशिक्षित युवाओं के रोजगार अवसरों पर असर डाला है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, यूपी से डीएलएड करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या सबसे अधिक है।
इन शिक्षकों की तैनाती जिले के दूरस्थ इलाकों में की गई है। गंगोलीहाट विकासखंड में 19, मुनस्यारी में 16 और धारचूला में 14 सहायक अध्यापक ऐसे हैं, जिनके डीएलएड डिप्लोमा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कुल मिलाकर 49 से अधिक शिक्षक फर्जी डिप्लोमा के संदेह में जांच के घेरे में बताए जा रहे हैं।
इस मामले को लेकर पूर्व दर्जा राज्यमंत्री खजान गुड्डू ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि बाहरी राज्यों से गलत तरीके से डिग्री लेकर प्रदेश के प्रशिक्षित युवाओं के अधिकार छीने जा रहे हैं, जबकि उत्तराखंड का युवा रोजगार के लिए भटक रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
वहीं पिथौरागढ़ के मुख्य शिक्षा अधिकारी तरुण कुमार पंत ने बताया कि सहायक अध्यापकों के स्थायी निवास प्रमाणपत्रों की जांच शुरू कर दी गई है। इसके लिए एक विशेष टीम गठित की गई है, जो यह पड़ताल कर रही है कि संबंधित अभ्यर्थियों ने यूपी और अन्य राज्यों के निवास प्रमाणपत्र किस आधार पर बनवाए। जांच रिपोर्ट आने के बाद विभाग द्वारा आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला सामने आने के बाद प्रदेश की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया और निवास प्रमाणपत्र प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


